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IAAC ने भारतीयों के लिए जारी की ‘Know Your Rights’ गाइड

गाइड में बताया गया है कि अगर ICE आपके घर आए तो क्या करना है? किस तरह का वारंट देखना चाहिए? क्या साइन नहीं करना चाहिए? क्या बोलना चाहिए? इसमें काम से जुड़े अधिकार भी समझाए गए हैं।

भारतीय अमेरिकी एडवोकेसी काउंसिल / IAAC / IAAC

इंडियन अमेरिकन एडवोकेसी काउंसिल यानी IAAC ने अमेरिका में रहने वाले भारतीयों के लिए अपनी पहली आधिकारिक Know Your Rights गाइड जारी की है। यह 10 पेज की गाइड है जो छात्रों, परिवारों, प्रोफेशनल्स और नागरिकों समेत सभी के लिए बनाई गई है चाहे उनका वीजा या इमिग्रेशन स्टेटस कुछ भी हो।

इसमें H-1B, H-4, F-1, L-1, OPT और ग्रीन कार्ड जैसे सभी कैटेगरी शामिल हैं। गाइड में साफ कहा गया है कि अमेरिका में संवैधानिक अधिकार हर व्यक्ति पर लागू होते हैं, चाहे उसका इमिग्रेशन स्टेटस कुछ भी हो। IAAC ने एक्स पर इसकी जानकारी देते हुए बताया कि यह गाइड खास तौर पर उन स्थितियों के लिए है, जब किसी को वीजा या पहचान के आधार पर परेशान किया जाए।

गाइड में बताया गया है कि अगर ICE आपके घर आए तो क्या करना है? किस तरह का वारंट देखना चाहिए? क्या साइन नहीं करना चाहिए? 
क्या बोलना चाहिए? इसमें काम से जुड़े अधिकार भी समझाए गए हैं।

बताया गया है कि आपका नियोक्ता आपको जबरन काम से नहीं हटा सकता, डिपोर्ट करने की धमकी नहीं दे सकता और H-1B फीस आपसे नहीं ले सकता। अगर ऐसा होता है तो किससे संपर्क करना है, यह भी गाइड में बताया गया है। 

इसके अलावा गाइड में यह भी समझाया गया है कि नफरत या भेदभाव के मामलों को कैसे रिकॉर्ड करें, कैसे रिपोर्ट करें और ऑनलाइन सबूत कैसे सुरक्षित रखें।

IAAC के मुताबिक 2025 में एंटी-इंडियन हेट पोस्ट्स को 300 मिलियन से ज्यादा बार देखा गया। हर चार में से एक भारतीय-अमेरिकी को अपमानजनक शब्दों का सामना करना पड़ा है। 48 प्रतिशत लोग ऑनलाइन नियमित रूप से नस्लभेदी कंटेंट देखते हैं और 31 प्रतिशत लोग डर की वजह से बोलने से बचते हैं।

IAAC का कहना है कि यही कारण है कि इस गाइड की जरूरत थी। उन्होंने कहा कि हमने यह गाइड इसलिए बनाई है ताकि आप डरें नहीं। आपके पास अधिकार हैं। उन्हें जानिए, इस्तेमाल कीजिए, सेव कीजिए और दूसरों तक पहुंचाइए। 

बता दें कि IAAC एक अमेरिकी संगठन है जो भारतीय और दक्षिण एशियाई समुदाय के हितों की रक्षा के लिए काम करता है। इसका मुख्य उद्देश्य एंटी-इंडियन हेट, भेदभाव और उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाना है।

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