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ग्रेटा थनबर्ग ने भारतीय छात्रों के विरोध-प्रदर्शन का समर्थन किया, बताया उम्मीद की किरण

थनबर्ग ने भारत में छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों का समर्थन किया, दुनिया भर से एकजुटता की अपील की और न्याय के लिए सामूहिक कार्रवाई की तारीफ की।

 ग्रेटा थनबर्ग ग्रेटा थनबर्ग / Screengrab from the video shared by the students' Federation of India (SFI) UK

जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने भारत में हाल ही में हुए छात्रों के विरोध प्रदर्शनों का समर्थन किया है। लंदन में 'स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया' (SFI) UK के एक कार्यक्रम में उन्होंने इस आंदोलन को उम्मीद की किरण और जन-शक्ति (people power) का उदाहरण बताया।

कार्यक्रम में बोलते हुए, थनबर्ग ने छात्रों के नेतृत्व वाले इस अभियान की तारीफ की और कहा कि इससे पता चलता है कि जब लोग किसी एक मकसद के लिए एकजुट होते हैं, तो क्या कुछ हासिल किया जा सकता है।

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थनबर्ग ने कहा कि भारत में छात्रों के विरोध प्रदर्शन ने हम सभी को गर्व महसूस कराया है। उन्होंने हमें उम्मीद दी है। वे दिखाते हैं कि जब लोग एक साथ आते हैं और विरोध करते हैं, तो हम क्या हासिल कर सकते हैं। वे जन-शक्ति का असली मतलब दिखाते हैं।

थनबर्ग ने इस आंदोलन के साथ अंतरराष्ट्रीय एकजुटता की भी अपील की और कहा कि छात्रों की मांगों को सिर्फ देश का अंदरूनी मामला नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्याय के लिए भारतीय छात्रों का संघर्ष और लोकतंत्र व आजादी के लिए व्यापक संघर्ष, हमारा भी संघर्ष है। उन्होंने कहा कि ऐसे आंदोलनों के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जरूरी है।

ये बातें उस छात्र विरोध प्रदर्शन के बाद कही गईं, जो आयोजकों के अनुसार 36 दिनों तक चला। ये प्रदर्शन 'नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट' (NEET) से जुड़ी गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोपों के बाद शुरू हुए थे।

प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई से जब सिविल सोसाइटी के कुछ वर्गों ने आलोचना की, तो इन विरोध प्रदर्शनों ने ध्यान खींचा। पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया और छात्रों के साथ एकजुटता जाहिर की।

आयोजकों के अनुसार, सरकार द्वारा उनकी कई मांगें मान लेने के बाद विरोध प्रदर्शन खत्म हुआ। इन मांगों में विवाद से प्रभावित परिवारों से जुड़े उपाय और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज पुलिस केस वापस लेना शामिल था।

आयोजकों ने कहा कि यह नतीजा एक अहम पड़ाव है, लेकिन साथ ही कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए उनका अभियान जारी रहेगा। एक बयान में, SFI UK ने छात्र आंदोलन को प्रेरणादायक और साहसी बताया। संगठन ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान छात्रों की कथित मौतों और पुलिस की कार्रवाई पर भी चिंता जिहिर की।

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