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न्यूयॉर्क में बिहार दिवस 2026 समारोह, चार प्रतिष्ठित सदस्यों को किया गया सम्मानित

कार्यक्रम के दौरान संता मिश्रा की पुस्तक 'गांव की मिट्टी मिटने नहीं देती' का विमोचन भी किया गया, जो व्यक्ति और उसकी जड़ों के बीच के गहरे संबंध को दर्शाती है।

 महावाणिज्य दूत बिनय प्रधान के साथ सभी सम्मानित व्यक्ति महावाणिज्य दूत बिनय प्रधान के साथ सभी सम्मानित व्यक्ति / Handout

न्यूयॉर्क में भारत के वाणिज्य दूतावास में 19 अप्रैल को आयोजित बिहार दिवस समारोह के दौरान वैश्विक बिहारी समुदाय के चार प्रतिष्ठित सदस्यों को बिहार विश्व गौरव सम्मान 2026 से सम्मानित किया गया। सम्मानित लोगों में सरोज कुमार झा, राजेश सिन्हा, संजय चौबे और हसमुख रंजन शामिल थे जिन्हें विभिन्न क्षेत्रों में उनकी उपलब्धियों और बिहार के विकास से जुड़े रहने के लिए सम्मानित किया गया।

अपने स्वीकृति संदेशों में सम्मानित लोगों ने परिवार, सेवा और समाज को वापस देने के मूल्यों पर जोर दिया। झा ने समाज के लिए निस्वार्थ योगदान के महत्व को रेखांकित किया। सिन्हा ने अपनी उद्यमिता यात्रा का श्रेय अपने पिता को दिया, जबकि चौबे ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में भी मजबूत व्यक्तिगत मूल्य बेहद जरूरी हैं। वहीं वर्चुअल संदेश के माध्यम से रंजन कहा कि अपनी जड़ों के लिए योगदान देना एक जिम्मेदारी है।

इस समारोह में गणमान्य लोग, सामुदायिक नेता और भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्य शामिल हुए। कार्यक्रम में बिहार दिवस को विरासत, प्रगति और भविष्य की दृष्टि के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का संचालन कोमल शरण ने किया, जिन्होंने मेहमानों का स्वागत किया और कार्यक्रम की शुरुआत की।

कार्यक्रम में उपस्थित लोग / Handout

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत का संदेश रहा, जिसमें उन्होंने वैश्विक बिहारी समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार परिवर्तन के लिए तैयार है और प्रवासियों से सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने शासन में जवाबदेही पर भी जोर दिया और विकास से जुड़ी चुनौतियों को पारदर्शिता के साथ हल करने का भरोसा दिया।

बिहार के उद्योग सचिव और बिहार फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कुंदन कुमार ने बिहार है तैयार का संदेश दोहराया। उन्होंने नई जीसीसी नीतियों और औद्योगिक विकास जैसी पहलों का उल्लेख किया और प्रवासी समुदाय से राज्य के अगले विकास चरण में योगदान देने की अपील की।

बिहार फाउंडेशन यूएसए-ईटीजेड के अध्यक्ष आलोक कुमार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता में बिहार की पहल पर बात की जिसमें सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना शामिल है। उन्होंने टाइगर एनालिटिक्स के संस्थापक महेश कुमार और बद्रीश प्रकाश के योगदान को सराहा, जिन्होंने इस पहल को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई। उन्होंने प्रत्यय अमृत, कुंदन कुमार, अभय कुमार सिंह और चंचल कुमार जैसे नेताओं का भी उल्लेख किया, जिन्होंने बिहार के युवाओं के लिए अवसर बनाए।

आलोक कुमार ने न्यूयॉर्क में भारत के उप महावाणिज्य दूत विशाल हर्ष और इलियास कुरैशी की उपस्थिति के लिए आभार जताया। उन्होंने आयोजन टीम और बीजेएएनए तथा बिहार फाउंडेशन के सदस्यों को भी धन्यवाद दिया।

कार्यक्रम के दौरान संता मिश्रा की पुस्तक 'गांव की मिट्टी मिटने नहीं देती' का विमोचन भी किया गया, जो व्यक्ति और उसकी जड़ों के बीच के गहरे संबंध को दर्शाती है।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में बिहार की समृद्ध परंपराओं को दिखाया गया। इसमें “कौन दिशा में ले के चला है बटोहीया” जैसे लोक गीत, सामा-चकेवा आधारित प्रस्तुतियां और शारदा सिन्हा के लोकप्रिय गीत शामिल थे। एक नाटक में बिहार की यात्रा को दिखाया गया, जिसमें सम्राट अशोक, नालंदा विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी का चंपारण आंदोलन और आधुनिक एआई आधारित भविष्य शामिल था, जिसे दर्शकों ने खड़े होकर सराहा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत के महावाणिज्य दूत बिनय एस. प्रधान ने कहा कि “लगभग हर किसी का एक दोस्त बिहार से होता है।” उन्होंने बिहार की ऐतिहासिक विरासत का जिक्र किया, जिसमें नालंदा विश्वविद्यालय की सह-शिक्षा प्रणाली शामिल है, और बिहार फाउंडेशन व बीजेएएनए जैसे संगठनों की भूमिका की सराहना की।

सामुदायिक नेता अविनाश गुप्ता और प्रीति कश्यप ने भी लोगों को संबोधित किया। उन्होंने बिहार के बारे में बदलती धारणाओं, बुनियादी ढांचे में सुधार और प्रवासी समुदाय में एकता और युवाओं की भागीदारी के महत्व पर जोर दिया।

कार्यक्रम का समापन एक नई ऊर्जा और जुड़ाव की भावना के साथ हुआ, जिसमें बिहार की विरासत का उत्सव मनाया गया और उसके भविष्य को आकार देने में प्रवासी समुदाय की भूमिका को रेखांकित किया गया।

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