ADVERTISEMENT

ADVERTISEMENT

ढिल्लों की दो टूक- अमेरिका में विदेशी आगंतुकों को कानून का पालन करना होगा नही तो...

अमेरिका की सहायक अटॉर्नी जनरल हरमीत ढिल्लों ने कहा कि अमेरिका में आने वाले विदेशी आगंतुकों खासकर कॉलेज परिसरों में पढ़ने वाले छात्रों को अमेरिकी कानूनों का पालन करना होगा, अन्यथा उन्हें देश छोड़ना पड़ सकता है।

हरमीत ढिल्लों। / X/ @pnjaban

अमेरिका की सहायक अटॉर्नी जनरल हरमीत ढिल्लों ने सोमवार को कहा कि अमेरिका में आने वाले विदेशी आगंतुकों, जिनमें कॉलेज परिसरों में पढ़ने वाले छात्र भी शामिल हैं, को अमेरिकी कानूनों का पालन करना होगा। ऐसा न करने वाले देश में रहने का अधिकार खो सकते हैं। 

अमेरिका की सहायक अटॉर्नी जनरल हरमीत ढिल्लों ने कहा कि अमेरिका में आने वाले विदेशी आगंतुकों खासकर कॉलेज परिसरों में पढ़ने वाले छात्रों को अमेरिकी कानूनों का पालन करना होगा, अन्यथा उन्हें देश छोड़ना पड़ सकता है।

यह भी पढ़ें: हरमीत ढिल्लों ने कहा- छात्रों से नस्लीय भेदभाव अमेरिकी मूल्यों के विरुद्ध

द ब्रीफ को दिए एक साक्षात्कार में ढिल्लों ने कहा कि यदि आगंतुक कानून का उल्लंघन करते हैं या विश्वविद्यालय परिसरों में अव्यवस्था फैलाते हैं तो अधिकारियों को सख्त नियम लागू करने चाहिए।

उन्होंने कहा, “अमेरिका में आने वाले आगंतुकों को कानून का पालन करना होगा, खासकर कॉलेज परिसरों में, वरना उन्हें यहां से जाना होगा।”

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि न्याय विभाग छात्रों के खिलाफ हिंसा या नफरत को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा और उनके नागरिक अधिकारों की रक्षा करेगा।

उनकी यह टिप्पणी अमेरिका के कई विश्वविद्यालयों में चल रहे तनाव के बीच आई है। ये तनाव 7 अक्टूबर 2023 को इज़राइल पर हुए हमलों और उसके बाद शुरू हुए मध्य-पूर्व संघर्ष से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद बढ़े हैं।

ढिल्लों ने अमेरिकी परिसरों में हुई अशांति का जिक्र करते हुए कहा कि कई प्रमुख विश्वविद्यालयों में यहूदी-विरोध (एंटीसेमिटिज़्म) और उग्र विरोध प्रदर्शनों को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं।

उन्होंने कहा, “आज हमारे आइवी लीग संस्थानों में भी एंटीसेमिटिज़्म और 7 अक्टूबर 2023 से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के कारण काफी अशांति देखने को मिल रही है।” जब आगंतुक कानून तोड़ते हैं तो अधिकारियों को शून्य सहनशीलता की नीति अपनानी चाहिए।

उन्होंने कहा, “अगर आप इस देश में मेहमान हैं तो आपको हमारे कानून तोड़ने या हमारे परिसरों में अव्यवस्था फैलाने का अधिकार नहीं है।”

ढिल्लों ने जोर दिया कि अमेरिका आने वाले विदेशी नागरिक मेहमान की तरह आते हैं और उन्हें देश के कानूनी ढांचे का सम्मान करना चाहिए। “आप मेहमान हैं, आगंतुक हैं। आप यहां आकर घर के सोफे पर पैर फैलाकर यह उम्मीद नहीं कर सकते कि आपका गर्मजोशी से स्वागत होगा।”

अमेरिका को, अन्य देशों की तरह, अपने कानून लागू करने और यह तय करने का अधिकार है कि कौन देश में रह सकता है। ढिल्लों ने कहा, “यह बिल्कुल उचित है कि हमारा देश, जैसे अन्य देश करते हैं, अपनी सीमाओं की निगरानी करे और कहे कि अगर आप हमारे कानूनों का पालन नहीं करेंगे, तो आपको यहां से जाना होगा।”

उन्होंने कहा कि कुछ देश ऐसे नियमों को अमेरिका से ज्यादा सख्ती से लागू करते हैं। “जब किसी को अपराध का दोषी ठहराया जाता है, तो वह यहां रहने का अधिकार खो देता है।”

उनकी टिप्पणियां अमेरिका में चल रही उस राजनीतिक बहस को उजागर करती हैं जिसमें कैंपस विरोध प्रदर्शन, आव्रजन कानूनों का पालन और अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे विदेशी छात्रों की जिम्मेदारियां शामिल हैं।

अक्टूबर 2023 में इज़राइल-हमास युद्ध शुरू होने के बाद कई अमेरिकी विश्वविद्यालयों में बड़े-पैमाने पर प्रदर्शन हुए। इन प्रदर्शनों के बाद सांसदों और संघीय अधिकारियों ने यहूदी-विरोध के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जबकि कुछ लोगों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर भी चिंता जताई।

अमेरिकी उच्च शिक्षा प्रणाली में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की बड़ी भूमिका है। अमेरिका के विश्वविद्यालयों में 10 लाख से अधिक विदेशी छात्र पढ़ते हैं। उनकी उपस्थिति अकादमिक शोध, नवाचार और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती है, जबकि वीज़ा नियमों के तहत उन्हें संघीय और विश्वविद्यालय नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। 

अन्य खबरों को पढ़ने के लिए क्लिक करें न्यू इंडिया अब्रॉड
 

Comments

Related

To continue...

Already have an account? Log in

Create your free account or log in