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गार्सेटी का आशावाद : भारत नवीकरणीय ऊर्जा का वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने को तैयार

बकौल गार्सेटी- मेरे शब्दों को याद रखें... अगले 30 वर्षों में भारत नवीकरणीय ऊर्जा क्रांति का शॉप फ्लोर होगा।

USISPF के आयोजन के दौरान गार्सेटी। / X

भारत में अमेरिका के राजदूत एरिक गार्सेटी ने वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा क्रांति में भारत की भूमिका के बारे में आशावाद व्यक्त किया है। गार्सेटी ने भविष्यवाणी की कि अगले तीन दशक के दौरान भारत इस क्षेत्र में दुनिया के लिए 'शॉप फ्लोर' के रूप में काम करेगा।

यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) द्वारा आयोजित दक्षिण एशिया महिला ऊर्जा नेतृत्व शिखर सम्मेलन में गार्सेटी ने सौर और पवन ऊर्जा में भारत के नेतृत्व को देखते हुए भारत के महत्वाकांक्षी नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों की सराहना की।

गार्सेटी ने कहा कि भारत की साहसिक नीतियां और लक्ष्य इसे न केवल घरेलू ऊर्जा मांगों को पूरा करने के लिए बल्कि किफायती सौर पैनलों, इलेक्ट्रोलाइज़र और महत्वपूर्ण बैटरियों का वैश्विक निर्माता बनने के लिए भी तैयार कर रहे हैं। बकौल गार्सेटी- मेरे शब्दों को याद रखें... अगले 30 वर्षों में भारत नवीकरणीय ऊर्जा क्रांति का शॉप फ्लोर होगा।

निवर्तमान दूत ने जलवायु चुनौतियों से निपटने में अमेरिका और भारत के बीच मजबूत साझेदारी पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सहयोग सरकारी प्रयासों से कहीं आगे तक फैला है जो काफी हद तक सामुदायिक स्तर की भागीदारी पर निर्भर करता है। गौरतलब है कि गार्सेटी 20 जनवरी को नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल के शपथ समारोह से पहले भारत छोड़ देंगे। 

गार्सेटी ने कहा कि भारत पृथ्वी पर लगभग किसी भी अन्य देश की तुलना में नवीकरणीय ऊर्जा में अधिक संसाधन लगा रहा है लेकिन इन पहलों की सफलता अंततः हमारे द्वारा सामुदायिक स्तर पर किए गए कार्यों पर निर्भर करेगी।

एक लचीली साझेदारी
गार्सेटी ने भारत-अमेरिका संबंधों की तुलना ताड़ के पेड़ के लचीलेपन से की। उन्होंने कहा कि तेज से तेज तूफान भी उसे गिरा नहीं सकता और तेज गति की हवा इसे दूर नहीं ले जा सकती। उन्होंने दोनों लोकतंत्रों के बीच स्थायी साझेदारी का जिक्र करते हुए कहा कि यह (संबंध) बढ़ता रहेगा। न केवल खुद को बल्कि दुनिया को भी फायदा पहुंचाएगा। 

एक लोकतांत्रिक दृष्टिकोण
अपनी टिप्पणी में गार्सेटी ने वैश्विक चुनौतियों से निपटने में लोकतंत्र की अंतर्निहित ताकत को रेखांकित किया और इसकी तुलना चीन जैसी निरंकुश प्रणालियों से की। बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण के बारे में एक चीनी मेयर के साथ बातचीत को याद करते हुए गार्सेटी ने भारत और अमेरिका जैसे लोकतंत्रों में लोगों को शामिल करने के मूल्य पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में आप लोगों को शामिल कर सकते हैं, उनके समाधान सुन सकते हैं और आगे बढ़ने का सबसे अच्छा रास्ता खोजने के लिए मिलकर काम कर सकते हैं।

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