मेक्सिको सिटी में बैसाखी और पंजाबी दिवस का उत्सव / Handout
मेक्सिको सिटी में वैसाखी और पंजाब दिवस के जीवंत कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसमें भारतीय प्रवासी और स्थानीय समुदाय के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में भारत और मेक्सिको के बीच बढ़ते सांस्कृतिक संबंधों को दिखाया गया।
मेक्सिको सिटी में भारतीय दूतावास ने पंजाबी समुदाय के साथ मिलकर 11 अप्रैल को यह कार्यक्रम आयोजित किया था। इसमें भारतीय परिवारों और मेक्सिको के लोगों ने भाग लिया। अगले दिन सामुदायिक कार्यक्रम भी हुआ। इससे सिख समुदाय की मजबूत उपस्थिति दिखाई दी।
कार्यक्रम की शुरुआत गुरु नानक देव के जीवन और शिक्षाओं पर आधारित प्रदर्शनी से हुई। इसके बाद शबद कीर्तन हुआ। इसमें समानता, सेवा और करुणा के संदेश दिए गए।
राजदूत पंकज शर्मा ने वैसाखी के महत्व पर बात की। उन्होंने कहा कि यह फसल का त्योहार होने के साथ सिख इतिहास का महत्वपूर्ण दिन भी है। इसी दिन 1699 में गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा की स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि यह पर्व साहस, अनुशासन और पहचान का प्रतीक है। उन्होंने वसुधैव कुटुंबकम की भावना का भी उल्लेख किया।
राजदूत ने भारत की कृषि में पंजाब के योगदान की सराहना की। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में पंजाब की भूमिका का भी जिक्र किया। उन्होंने मेक्सिको में पंजाबी समुदाय की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह समुदाय सांस्कृतिक संबंध मजबूत कर रहा है। उन्होंने कोविड-19 के दौरान गुरुद्वारा द्वारा की गई मदद को भी सराहा।
वहीं समुदाय नेता इंदर पाल सिंह ने पंजाब के मूल्यों पर बात की। उन्होंने सेवा और एकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सिख समुदाय दुनिया भर में सेवा करता है। उन्होंने सांस्कृतिक परंपराओं को बचाने की बात भी कही।
आपको बताएं कि कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं। इसमें कथक नृत्य शामिल था। 'पंजाब: साहस, सेवा और प्रगति' विषय पर प्रस्तुति भी दी गई। कार्यक्रम में बच्चों ने पारंपरिक पंजाबी पोशाक पेश की। साथ ही गिद्धा और भांगड़ा ने कार्यक्रम में उत्साह बढ़ाया।
राजदूत ने गुरुद्वारा को कुछ पुस्तकें भी भेंट कीं। कार्यक्रम का समापन सामूहिक भोजन के साथ हुआ। इसमें लस्सी और छोले भटूरे जैसे व्यंजन शामिल थे। 12 अप्रैल को भी कार्यक्रम जारी रहा। इसमें सिख समुदाय ने आयोजन किया जिसमें भारतीय और मेक्सिकन सिख शामिल हुए। राजदूत भी इसमें उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में कीर्तन और गुरबाणी पाठ हुआ जिसमें करीब 250 लोगों ने लंगर में भाग लिया। इससे समानता और सेवा का संदेश मिला। इन दोनों कार्यक्रमों ने दिखाया कि संस्कृति सीमाओं से परे है। इससे भारत और मेक्सिको के संबंध और मजबूत हुए।
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