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नागरिकता पर ट्रंप की पोस्ट को लेकर विवाद, भारत का जिक्र करने पर नाराजगी

पोस्ट में कहा गया कि यहां जन्म लेने वाला बच्चा तुरंत नागरिक बन जाता है और फिर पूरा परिवार चीन, भारत या किसी अन्य देश से यहां आ जाता है।

 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप / REUTERS/Evan Vucci/File Photo

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस पोस्ट में जन्मसिद्ध नागरिकता (बर्थराइट सिटिजनशिप) की आलोचना की गई और प्रवासियों व कुछ समुदायों को निशाना बनाया गया। इस पर भारतीय-अमेरिकी संगठनों और नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि ऐसी टिप्पणियां नस्लवाद को बढ़ावा दे सकती हैं।

इस पोस्ट में ट्रंप ने लंबा बयान साझा किया जिसमें उन्होंने जन्मसिद्ध नागरिकता और कानूनी संगठनों की आलोचना की। इसमें अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन को गैंगस्टर आपराधिक संगठन बताया गया और कहा गया कि इसने देश को ईरान से भी ज्यादा नुकसान पहुंचाया है।

पोस्ट में संविधान पर भी सवाल उठाए गए। इसमें कहा गया कि जन्मसिद्ध नागरिकता पर राष्ट्रीय स्तर पर मतदान होना चाहिए, इसे वकीलों के हाथ में नहीं छोड़ना चाहिए। फैसला नागरिकों को करना चाहिए।

इसमें प्रवासियों को लेकर भी व्यापक दावे किए गए। कहा गया कि यहां जन्म लेने वाला बच्चा तुरंत नागरिक बन जाता है और फिर पूरा परिवार चीन, भारत या किसी अन्य देश से यहां आ जाता है।

इसके साथ ही रोजगार को लेकर भी टिप्पणी की गई। पोस्ट में कहा गया कि कैलिफोर्निया में गोरे पुरुषों को नौकरी नहीं मिलती… आपको हाई-टेक कंपनियों में नौकरी नहीं मिलेगी।

इन टिप्पणियों पर तुरंत प्रतिक्रिया आई। 



हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने कहा कि वह इस पोस्ट से गहराई से चिंतित हैं। संगठन ने अपने बयान में कहा कि हम राष्ट्रपति द्वारा भारतीय और चीनी मूल के अमेरिकियों को निशाना बनाते हुए इस तरह की नफरत भरी और नस्लवादी पोस्ट साझा किए जाने से बहुत परेशान हैं। ऐसी टिप्पणियां नफरत को बढ़ाएंगी और समुदायों को खतरे में डालेंगी। खासकर ऐसे समय में जब नस्लवाद और विदेशियों के प्रति डर पहले से ही बढ़ा हुआ है।

संगठन ने ट्रंप से अपील की कि वे इस पोस्ट पर पुनर्विचार करें, इसे हटाएं और एशियाई मूल के अमेरिकियों के योगदान को स्वीकार करें। 

भारत की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि जब वह हडसन इंस्टीट्यूट जा रही थीं, तब उन्होंने ट्रंप की यह टिप्पणी देखी। उन्होंने कहा कि मैं उम्मीद करती हूं कि भारत को खराब जगह कहने जैसी बातों और ऐसी टिप्पणियों को अलग रखा जाए। 

पोस्ट में अमेरिकी न्याय प्रणाली और सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए। इसमें कहा गया कि हम अपने देश का भविष्य कुछ वकीलों के हाथ में नहीं छोड़ सकते। साथ ही यह भी कहा गया कि संविधान उस समय लिखा गया था जब हवाई यात्रा और इंटरनेट नहीं थे। इसलिए आज के संदर्भ में इसकी व्याख्या पर सवाल उठाए गए।

अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता संविधान के 14वें संशोधन के तहत दी जाती है। यह लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रही है। कानूनी विशेषज्ञ आम तौर पर मानते हैं कि इस प्रावधान के तहत अमेरिका में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति नागरिक होता है। चाहे उसके माता-पिता की स्थिति कुछ भी हो।

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