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पाकिस्तान में ईसाई लड़की का जबरन धर्मांतरण, मुस्लिम युवक से कराई शादी

पंजाब के साहीवाल जिले की रहने वाली 13 वर्षीय ईसाई लड़की, जो कक्षा छह की छात्रा है, का कथित तौर पर अपहरण किया गया।

प्रतीकात्मक तस्वीर / Photo Credit: Voice of Pakistan Minority

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से एक गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन का मामला सामने आया है, जहां एक नाबालिग ईसाई लड़की का अपहरण कर जबरन इस्लाम धर्म अपनाने और मुस्लिम युवक से शादी कराने का आरोप लगा है। एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि यह घटना देश में बच्चों और धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।

वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी (वीओपीएम) के अनुसार, पंजाब के साहीवाल जिले की रहने वाली 13 वर्षीय ईसाई लड़की, जो कक्षा छह की छात्रा है, का कथित तौर पर अपहरण किया गया। इसके बाद उसे दो ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर किया गया, जिनके लिए कोई भी बच्चा सहमति देने में सक्षम नहीं होता, जबरन धर्मांतरण और जबरन विवाह।

मानवाधिकार संगठन ने बताया कि लड़की के माता-पिता खुद को बेहद असहाय और कमजोर स्थिति में रह रहे हैं। पीड़िता की मां पैर में फ्रैक्चर के कारण विकलांग हैं, जबकि पिता शारीरिक रूप से अक्षम हैं और अंडे बेचकर परिवार का गुजारा करते हैं। संगठन ने कहा, “जिस घर में हर रुपया मायने रखता है और हर दिन संघर्ष से भरा है, वहां बेटी का गायब हो जाना ऐसा डरावना सपना बन गया है, जो सुबह होने पर भी खत्म नहीं होता।”

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परिवार और स्थानीय समुदाय के लोगों के हवाले से वीओपीएम ने बताया कि कथित अपहरणकर्ता की पहचान अली हैदर के रूप में हुई है, जो पाकिस्तान के मुस्लिम जट्ट समुदाय से बताया जा रहा है। आरोप है कि अपहरण के बाद लड़की को जबरन इस्लाम कबूल कराया गया और उसी युवक से शादी के लिए मजबूर किया गया।

संगठन ने कहा कि समुदाय के प्रतिनिधियों ने भी इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे मानवाधिकारों, खासकर बाल अधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताया है।

वीओपीएम का आरोप है कि घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद लड़की की बरामदगी में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। इस बीच परिवार को लगातार धमकियों का सामना करना पड़ रहा है, ताकि वे कानूनी कार्रवाई न कर सकें।

संगठन ने कहा, “यह क्रूरता पर क्रूरता है- पहले बच्चे को छीन लिया जाता है और फिर माता-पिता से कहा जाता है कि इसे स्वीकार करो या नुकसान झेलो। विकलांगता और गरीबी से जूझ रहे परिवारों के लिए डर एक पिंजरा बन जाता है।”

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के हवाले से वीओपीएम ने कहा कि शादी के लिए जबरन धर्मांतरण उन जगहों पर फलता-फूलता है, जहां शक्ति का असंतुलन होता है, समुदाय खुद को अलग-थलग महसूस करते हैं और अपराधियों को लगता है कि वे बिना सजा के बच सकते हैं।

वीओपीएम ने पाकिस्तानी प्रशासन से मांग की है कि लड़की को तुरंत सुरक्षित रूप से बरामद किया जाए, उसकी सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित की जाए, परिवार को धमकियों से बचाया जाए और मामले में पारदर्शी कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाए। संगठन ने जोर देकर कहा कि इस केस को किसी “निजी मामला” मानकर दबाया न जाए, बल्कि इसे एक नाबालिग के खिलाफ गंभीर अपराध के रूप में देखा जाए।

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