भारत के युवाओं को लुभा रही है भक्ति-क्लबिंग / Facebook/Praveen Kumar
भारत की राजधानी नई दिल्ली में भजन क्लबिंग का नया ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यहां युवा पारंपरिक भजनों को गिटार और तेज ड्रम बीट्स के साथ सुनते हुए डांस कर रहे हैं और इसे एक नए तरह की आध्यात्मिक नाइटलाइफ के रूप में देख रहे हैं।
नोएडा के एक कैफे चायलीला में भी ऐसा ही माहौल देखने को मिलता है जहां लोग भगवान कृष्ण के भजनों पर झूमते नजर आते हैं।
30 साल के आईटी प्रोफेशनल हिमांशु गुप्ता ने कहा कि मैं बहुत एनर्जेटिक और जिंदा महसूस कर रहा था। हिंदू धर्म में प्राचीन समय से गाए जाने वाले गीत यानी भजन को हमेशा से इंसान और भगवान के बीच जुड़ाव का माध्यम कहा जाता हैं। इसी का आधुनिक रूप भजन क्लबिंग है जो खासकर युवाओं को आकर्षित कर रहा है। सिर्फ मार्च महीने में ही दिल्ली में ऐसे कम से कम पांच बड़े कार्यक्रम हुए, जिनमें हजारों लोग शामिल हुए।
इस महीने पुराना किला में एक ओपन-एयर कार्यक्रम हुआ था जिसमें करीब 7,000 लोग पहुंचे थे। यह माहौल किसी धार्मिक कार्यक्रम से ज्यादा एक म्यूजिक फेस्ट या रेव पार्टी जैसा लग रहा था। 31 साल की वैज्ञानिक ऐश्वर्या गुप्ता ने कहा कि यह युवाओं को भक्ति और आध्यात्म से जोड़ने का मौका देता है। यहां आकर बहुत अच्छा लगता है।
इस कार्यक्रम में म्यूजिक के दौरान लोग गिटार और ड्रम के साथ भजनों पर झूम रहे थे। 27 साल के डॉक्टर और फिटनेस इन्फ्लुएंसर कुमार शुभम ने कहा कि यह बहुत सुकून देने वाला अनुभव है और इससे भारतीय होने पर गर्व भी महसूस होता है। वहीं 28 साल के बिजनेसमैन जय आहूजा ने कहा कि आज के युवा धर्म से दूर हो रहे हैं लेकिन यह उन्हें सही रास्ता दिखाता है और भगवान से जोड़ता है।
यह ट्रेंड भारत में हिंदू पहचान और संस्कृति के बढ़ते सार्वजनिक प्रदर्शन का भी हिस्सा माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस ट्रेंड का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि भजन सदियों से भारतीय संस्कृति की आत्मा रहे हैं। जनवरी में अपने रेडियो कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भजन क्लबिंग ने भक्ति को युवाओं की जिंदगी का हिस्सा बना दिया है। इस महीने जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में हुए एक बड़े कार्यक्रम में हजारों लोग शामिल हुए। इस कार्यक्रम की शुरुआत दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने की थी।
पुराना किला में कार्यक्रम आयोजित करने वाले 26 साल के निकुंज गुप्ता ने कहा कि नई पीढ़ी को जोड़ने के लिए आध्यात्म जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम युवाओं को बिना शराब के भी एक मजेदार माहौल देता है। यह युवाओं को एक नया विकल्प देता है, जहां उन्हें क्लब की तरह शराब पीने की जरूरत नहीं होती। उन्होंने ये भी कहा कि हम चाहते हैं कि युवा नशे से नहीं, बल्कि आध्यात्म से जुड़े। यह ट्रेंड अब भारत से बाहर भी फैल रहा है।
नेपाल में फरवरी में हुए एक ऐसे कार्यक्रम में 3,000 से ज्यादा लोग शामिल हुए थे। इस कार्यक्रम के सह-संस्थापक अभिषेक अधिकारी ने कहा कि हम भजनों को आधुनिक तरीके से पेश कर रहे हैं, ताकि युवा उनसे जुड़ सकें। यह उन लोगों के लिए है जो अपनी आध्यात्मिक यात्रा शुरू करना चाहते हैं, और लोग इसे खूब पसंद कर रहे हैं। भारत में फैशन इंडस्ट्री से जुड़े रत्नदीप लाल ने इन कार्यक्रमों की तुलना अंतरराष्ट्रीय कॉन्सर्ट्स से की। उन्होंने कहा कि मैं शकीरा जैसे बड़े कॉन्सर्ट्स में गया हूं लेकिन भारत में इस तरह का प्रयास बहुत अच्छा है, जो भजनों के जरिए नई पीढ़ी को जोड़ता है।
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