ADVERTISEMENT

ADVERTISEMENT

ऑपरेशन सिंदूर के एक साल : आतंकवाद पर कड़ा प्रहार, भारत की सैन्य कार्रवाई से पाकिस्तान धराशायी

'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान जिस तरह भारतीय सेना के तीनों अंगों ने एकसाथ पाकिस्तान पर ताबड़तोड़ हमले किए कि पाकिस्तान की सारी तैयारियां और गीदड़भभकी भी धराशायी हो गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी13 मई 2025 को जालंधर स्थित आदमपुर एयर बेस पहुंचे थे। / IANS

पाकिस्तान और पीओके में मौजूद आतंकवादियों के लॉन्च पैड पर भारतीय सेना के अचूक प्रहार आज भी पाकिस्तानी नेताओं और सैन्य अधिकारियों के जिस्म में सिहरन पैदा करने के लिए काफी है। 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान जिस तरह भारतीय सेना के तीनों अंगों ने एकसाथ पाकिस्तान पर ताबड़तोड़ हमले किए कि पाकिस्तान की सारी तैयारियां और गीदड़भभकी भी धराशायी हो गई। 

 

यहां तक कि जब भारतीय शौर्य गाथा का बखान करने देश की शेरनियां सामने आईं, तो इस बदले भारत की तारीफ दुनियाभर में हुई। पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जिस तरह से भारतीय सेना ने 'घर में घुसकर मारने' की नीति रखी है, उसका असर पाकिस्तान के साथ चीन पर भी देखने को मिल रहा है। यही कारण है कि भारत की ताबड़तोड़ सैन्य कार्रवाई और सिंधु नदी से जुड़े फैसले के बाद पाकिस्तान चारों खाने चित हो गया है। यहां तक कि उसकी जनता भी कहीं न कहीं अपने शासकों के विरोध में है।

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की निर्मम हत्या के बाद भारत ने जिस तरह से जवाबी कार्रवाई की, वह दुनियाभर के आधुनिक सैन्य इतिहास में एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है। 'ऑपरेशन सिंदूर' नाम से चलाए गए इस अभियान ने न सिर्फ आतंकवादी ढांचे को गहरी चोट पहुंचाई, बल्कि भारत की सैन्य क्षमता, रणनीतिक सोच और राजनीतिक इच्छाशक्ति का भी स्पष्ट प्रदर्शन किया।

इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सटीकता और सीमित अवधि रही। मात्र चार दिनों के भीतर भारतीय सेना ने अपने सभी प्रमुख लक्ष्य हासिल कर लिए और इसके बाद स्थापित सैन्य चैनलों के माध्यम से युद्धविराम स्वीकार कर लिया। जहां दुनिया के कई संघर्ष वर्षों तक खिंचते रहे हैं, वहीं भारत ने एक नियंत्रित और उद्देश्यपूर्ण सैन्य कार्रवाई का उदाहरण पेश किया।

ऑपरेशन के दौरान भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में स्थित नौ बड़े आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। ये ठिकाने लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों के लिए लॉन्चपैड के रूप में काम कर रहे थे। सियालकोट और बहावलपुर जैसे क्षेत्रों तक की गई कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत की पहुंच अब केवल सीमावर्ती इलाकों तक सीमित नहीं है। इस दौरान 100 से अधिक आतंकी मारे गए थे, जिनमें कई शीर्ष कमांडर भी शामिल थे।

भारत ने जहां आतंक और सैन्य ढांचे को निशाना बनाया, वहीं नागरिकों को नुकसान से बचाने पर विशेष ध्यान दिया। इसके विपरीत, पाकिस्तान ने नागरिक और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की, लेकिन भारत की उन्नत रक्षा प्रणाली ने इन हमलों को नाकाम कर दिया।

इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना की भूमिका बेहद अहम रही। राफेल विमानों, स्कैल्प मिसाइलों और हैम्मर बमों का इस्तेमाल करते हुए भारतीय वायुसेना ने महज 23 मिनट में अपने मिशन को अंजाम दिया। पाकिस्तान की एयर डिफेंस प्रणाली को जाम करते हुए इन हमलों को अंजाम देना तकनीकी और रणनीतिक श्रेष्ठता का प्रमाण माना जा रहा है।

भारत की एकीकृत वायु कमान एवं नियंत्रण प्रणाली (आईएसीसीएस) और स्वदेशी ‘आकाशतीर’ प्रणाली ने दुश्मन के ड्रोन और मिसाइल हमलों को विफल कर दिया। इससे देश के भीतर किसी बड़े नुकसान को रोका जा सका, जो इस ऑपरेशन की एक और बड़ी सफलता रही।

10 मई को भारत ने अपने अभियान का दायरा बढ़ाते हुए पाकिस्तान के 11 सैन्य एयरबेस को निशाना बनाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस कार्रवाई में पाकिस्तान की वायुसेना की लगभग 20 प्रतिशत क्षमता को नुकसान पहुंचा। यह कदम एक परमाणु संपन्न देश के खिलाफ भारत की रणनीतिक हिम्मत को दर्शाता है।

ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय सेना की ‘जॉइंटनेस’ यानी तीनों सेनाओं के तालमेल को भी मजबूती से स्थापित किया। जहां नौसेना ने समुद्री दबाव बनाए रखा, वहीं थलसेना और वायुसेना ने समन्वित तरीके से कार्रवाई को अंजाम दिया। इसके साथ ही, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और तकनीक की भूमिका भी साफ तौर पर सामने आई। ब्रह्मोस, आकाश, तेजस और एंटी-ड्रोन सिस्टम जैसे प्लेटफॉर्म इस ऑपरेशन में प्रभावी साबित हुए।

पिछले एक दशक में रक्षा क्षेत्र में हुए सुधार जैसे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का गठन, ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत रक्षा उत्पादन में वृद्धि और निजी क्षेत्र की भागीदारी इस सफलता की मजबूत नींव बने। आज रक्षा उत्पादन का बड़ा हिस्सा देश में ही हो रहा है, जिससे भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और मजबूत हुई है।

इस ऑपरेशन में ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम ने भी अहम भूमिका निभाई। इसरो द्वारा उपलब्ध कराई गई सैटेलाइट निगरानी और सूचना प्रबंधन ने मिशन को और सटीक बनाया। साथ ही, गलत सूचना से निपटने और जनसंचार को नियंत्रित रखने में भी सरकार सफल रही।

राजनीतिक नेतृत्व की स्पष्ट दिशा भी इस सफलता का एक बड़ा कारण रही। सरकार ने सेना को पूरी ऑपरेशनल स्वतंत्रता दी, लेकिन साथ ही नागरिकों को नुकसान से बचाने का निर्देश भी स्पष्ट रखा। यह संतुलन भारत की रणनीतिक सोच और मानवीय दृष्टिकोण को दर्शाता है।

ऑपरेशन सिंदूर ने यह भी संकेत दिया कि भारत अब केवल कूटनीतिक विरोध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर निर्णायक सैन्य कार्रवाई करने के लिए तैयार है। यह ऑपरेशन भविष्य में आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति के लिए एक ‘नया सामान्य’ स्थापित करता है।

कुल मिलाकर, ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित किया कि आधुनिक युद्ध केवल ताकत का नहीं, बल्कि रणनीति, तकनीक, तालमेल और राजनीतिक इच्छाशक्ति का भी खेल है और इन सभी मोर्चों पर भारत ने अपनी क्षमता का प्रभावी प्रदर्शन किया।

Comments

Related

To continue...

Already have an account? Log in

Create your free account or log in