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ब्रेन ड्रेन रोकने के लिए भारत का बड़ा कदम, प्रवासी शोधकर्ताओं को देश लौटने का न्योता

यह योजना विशेष रूप से विदेशों में कार्यरत भारतीय नागरिकों, ओसीआई कार्डधारकों और पीआईओ समुदाय के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है जिनका शोध, नवाचार और तकनीक के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान रहा है।

 सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर / Unsplash

भारत ने दुनिया भर में काम कर रहे भारतीय मूल के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, तकनीकी विशेषज्ञों और नवाचारकर्ताओं को आकर्षित करने के लिए प्रधानमंत्री रिसर्च चेयर (PMRC) योजना 2026 के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। 

शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य वैश्विक भारतीय प्रतिभाओं को देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों, राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं और शोध संस्थानों से जोड़कर भारत की शोध क्षमता को मजबूत बनाना है। यह योजना विशेष रूप से विदेशों में कार्यरत भारतीय नागरिकों, ओसीआई कार्डधारकों और पीआईओ समुदाय के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है जिनका शोध, नवाचार और तकनीक के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान रहा है।

योजना के तहत शोधकर्ताओं की नियुक्ति तीन श्रेणियों में की जाएगी - 

1. युवा शोध फेलो
2. वरिष्ठ शोध फेलो
3. रिसर्च चेयर

यह कार्यक्रम 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए चलेगा। योजना का फोकस भारत के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले 14 रणनीतिक क्षेत्रों पर रहेगा। इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, उन्नत सामग्री, जैव प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य और मेडटेक, जलवायु और ऊर्जा, साइबर सुरक्षा, कृषि एवं खाद्य तकनीक, अंतरिक्ष, रक्षा, उन्नत संचार और विनिर्माण तकनीक शामिल हैं।

चयनित शोधकर्ताओं को फेलोशिप, शोध अनुदान, स्थानांतरण सहायता और अत्याधुनिक प्रयोगशाला सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। श्रेणी के अनुसार वार्षिक फेलोशिप राशि 15 लाख रुपये से 60 लाख रुपये तक हो सकती है, जबकि शोध अनुदान 5 करोड़ रुपये तक दिया जा सकता है।

शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देना और भारत में शोध एवं नवाचार की गति तेज करना है। योजना के तहत सात संस्थानों को लीड इंस्टीट्यूशन बनाया गया है। इनमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली, आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी मद्रास, आईआईटी कानपुर, आईआईटी हैदराबाद, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद और भारतीय विज्ञान संस्थान हैं।

शोधकर्ताओं और भाग लेने वाले संस्थानों के लिए आवेदन प्रक्रिया 1 जून से शुरू हो चुकी है और 15 जुलाई 2026 तक खुली रहेगी। यह कार्यक्रम भारत की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत सरकार वैश्विक भारतीय वैज्ञानिक समुदाय को देश के विकास से जोड़ना चाहती है और भारत को शोध, नवाचार तथा तकनीकी विकास का वैश्विक केंद्र बनाने का प्रयास कर रही है।

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