भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल। / Reuters/Arnd Wiegmann/File
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को खाद्य, कृषि और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र से जुड़े लोगों से भारत को कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों (प्रोसेस्ड फूड) का दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक बनाने की दिशा में मिलकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत के बढ़ते व्यापार समझौते और भारतीय उत्पादों की वैश्विक मांग इस दिशा में बड़े अवसर पैदा कर रहे हैं।
राष्ट्रीय दिल्ली राजधानी में आयोजित 'आहार - द इंटरनेशनल फूड एंड हॉस्पिटैलिटी फेयर' के 40वें संस्करण के उद्घाटन के दौरान गोयल ने कहा कि भारत का खाद्य और कृषि उत्पादों का निर्यात, जिसमें कृषि उत्पाद और मत्स्य पालन शामिल हैं, अब सालाना करीब 5 लाख करोड़ रुपए (55 अरब डॉलर से अधिक) तक पहुंच गया है। इसके साथ ही भारत दुनिया का सातवां सबसे बड़ा कृषि उत्पाद निर्यातक बन गया है।
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उन्होंने बताया कि 2014 से 2025 के बीच पिछले 11 वर्षों में भारत के कृषि और खाद्य निर्यात में काफी तेजी आई है। इस दौरान प्रोसेस्ड फूड का निर्यात चार गुना, फल और दालों का निर्यात तीन गुना, प्रोसेस्ड सब्जियों का निर्यात चार गुना, कोको का निर्यात तीन गुना और अनाज का निर्यात दोगुना हो गया है। वहीं चावल का निर्यात भी इस अवधि में 62 प्रतिशत बढ़ा है।
गोयल ने कहा कि ये उपलब्धियां भारत को कृषि और प्रोसेस्ड फूड निर्यात में दुनिया में शीर्ष स्थान हासिल करने के लिए प्रेरित करती हैं। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य पूरी तरह हासिल किया जा सकता है और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन के अनुरूप है, जिसमें भारत को 'दुनिया की फूड बास्केट' बनाने की बात कही गई है।
मंत्री ने बताया कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में भारत ने नौ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) किए हैं, जिनसे 38 विकसित और समृद्ध देशों के बाजारों तक पहुंच मिली है। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए बड़े अवसर खुले हैं। उन्होंने कहा कि आज भारत को वैश्विक व्यापार के लगभग दो-तिहाई हिस्से तक प्राथमिक बाजार पहुंच प्राप्त है, जिससे भारत एक आकर्षक निवेश गंतव्य बन रहा है और भारतीय कंपनियां वैश्विक वैल्यू चेन से जुड़ रही हैं।
गोयल ने कहा कि एफटीए वार्ता के दौरान सरकार ने घरेलू हितधारकों, खासकर किसानों, मछुआरों और एमएसएमई के हितों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा है। उन्होंने बताया कि डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में विदेशी उत्पादकों को कोई रियायत नहीं दी गई है। इसी तरह जीन संशोधित (जीएम) उत्पादों को भी शुल्क में छूट या बाजार तक पहुंच नहीं दी गई है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चावल, गेहूं, मक्का, सोया मील और कई तरह की दालों जैसे प्रमुख कृषि उत्पादों को भी व्यापार समझौतों में सुरक्षित रखा गया है। वहीं, चीनी क्षेत्र में भी आम तौर पर कोई रियायत नहीं दी गई है, ताकि विदेशी आयात से भारतीय गन्ना किसानों और घरेलू उत्पादकों को नुकसान न हो।
मंत्री ने कहा कि इन कदमों से एक ओर भारत की घरेलू ताकत सुरक्षित रहती है, वहीं दूसरी ओर भारतीय उत्पादों के लिए नए वैश्विक अवसर भी बनते हैं। उन्होंने उद्योग और व्यापार से जुड़े लोगों से अपील की कि वे लोगों को यह समझाएं कि भारत के एफटीए देश के हितों की रक्षा करते हुए अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ाने में मदद करते हैं।
गोयल ने किसानों और उद्यमियों से 1 लाख करोड़ रुपए के एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड का लाभ उठाने और फूड प्रोसेसिंग व वैल्यू एडिशन पर ध्यान देने की भी अपील की। इससे किसानों को वैश्विक बाजार में बेहतर कीमत वाले उत्पाद बेचने का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि अब बड़ी संख्या में छोटे उद्यम भी फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे रोजगार और विकास के नए अवसर बन रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इस बार आहार प्रदर्शनी में पहली बार इटली को पार्टनर देश बनाया गया है। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि 13 मार्च और शनिवार को यह प्रदर्शनी आम जनता के लिए भी खुली रहेगी, ताकि खासकर युवा भारत और दुनिया के फूड, बेवरेज और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की ताकत को करीब से देख सकें।
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