भारत के विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह। / X/@KVSinghMPGonda
भारत के विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि भारत ने अब तक 23 देशों के साथ 27 माइग्रेशन और मोबिलिटी समझौते किए हैं, लेकिन प्रवासियों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की बेहतर रक्षा के लिए इन साझेदारियों का और विस्तार किया जाना जरूरी है।
उन्होंने यह बात मंगलवार को आयोजित दूसरे अंतरराष्ट्रीय माइग्रेशन रिव्यू फोरम (IMRF) में कही। यह मंच संयुक्त राष्ट्र के 'सेफ, ऑर्डरली एंड रेगुलर माइग्रेशन' पर 2018 में अपनाए गए ग्लोबल कॉम्पैक्ट की हर चार साल में होने वाली समीक्षा है।
कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि ये समझौते संगठित और कौशल-आधारित आवागमन को बढ़ावा देते हैं, जिसमें श्रमिकों के कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रियाओं पर खास जोर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि हम मानते हैं कि विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए इन साझेदारियों को और मजबूत और विस्तारित करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि भारत ने हाल के समय में यूरोपीय संघ के साथ जनवरी में, ब्रिटेन के साथ पिछले साल जुलाई में और न्यूजीलैंड के साथ पिछले महीने महत्वपूर्ण समझौते किए हैं।
कीर्तिवर्धन सिंह ने कहा कि विदेश जाने के इच्छुक लोगों के कौशल को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक विकसित करना भारत की माइग्रेशन नीति का एक अहम स्तंभ है। उन्होंने बताया कि 'स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर' और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए भारतीय कामगारों को वैश्विक मानकों के अनुसार तैयार किया जा रहा है और साझेदार देशों के साथ कौशल की पारस्परिक मान्यता पर भी काम हो रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत सरकार प्रवास से पहले ओरिएंटेशन कार्यक्रम चलाती है, जिससे लोग विदेश में काम करने के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि ई-माइग्रेट सिस्टम, नेशनल करियर सर्विस पोर्टल और स्किल इंडिया डिजिटल हब जैसे प्लेटफॉर्म ने भर्ती और तैनाती की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई है।
कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों का कल्याण सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए इंडियन कम्युनिटी वेलफेयर फंड और एमएडीएडी पोर्टल जैसे कदम उठाए गए हैं। एमएडीएडी पोर्टल के जरिए प्रवासी भारतीय अपनी समस्याएं ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं और उनकी प्रगति पर नजर रख सकते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की काउंसलर सेवाएं भी विदेशों में भारतीयों को कानूनी, वित्तीय और बीमा से जुड़ी मदद समय पर उपलब्ध कराती हैं।
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