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अमेरिका में कई अदालतों ने इस सप्ताह इमिग्रेशन डिटेंशन में रखे गए कई भारतीय नागरिकों के लिए बॉन्ड सुनवाई या तत्काल रिहाई का आदेश दिया है। ये आदेश कैलिफोर्निया, मिशिगन, न्यूयॉर्क और ओक्लाहोमा की जिला अदालतों से आए। न्यायाधीशों ने कहा कि इमिग्रेशन अधिकारियों ने या तो गलत डिटेंशन कानून लागू किया या पर्याप्त विधिक प्रक्रिया (ड्यू प्रोसेस) नहीं की।
कैलिफोर्निया में सैन डिएगो अदालत ने हरबीत सिंह की ओर से दायर याचिका मंजूर की और सात दिनों के भीतर 'व्यक्तिगत बॉन्ड सुनवाई' कराने का आदेश दिया। न्यायाधीश ने आदेश दिया कि बिना बॉन्ड सुनवाई के लंबी हिरासत 'अनुचित है और विधिक प्रक्रिया का उल्लंघन है।' सरकार को स्पष्ट और ठोस साक्ष्य से यह साबित करना होगा कि उससे फरार होने का जोखिम है या समुदाय के लिए खतरा है।
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मिशिगन में वेस्टर्न डिस्ट्रिक्ट की एक अदालत ने सागर राम को सशर्त राहत दी। अदालत ने पांच कार्यदिवसों के भीतर धारा 1226(ए) के तहत बॉन्ड सुनवाई कराने या तत्काल रिहाई का आदेश दिया। न्यायाधीश ने सरकार के इस दावे को खारिज कर दिया कि जरूरी डिटेंशन लागू होता है।
ओक्लाहोमा में, एक अदालत ने करनदीप सिंह के मामले में इसी तरह का फैसला दिया। न्यायाधीश ने कहा कि उनकी हिरासत धारा 1226(ए) के अंतर्गत आती है, जो बॉन्ड की अनुमति देती है, न कि धारा 1225(बी)(2) के अनिवार्य हिरासत प्रावधान के तहत। अदालत ने तुरंत बॉन्ड सुनवाई का आदेश दिया।
न्यूयॉर्क में, ब्रुकलिन की अदालत ने हरमनप्रीत सिंह को हैबियस राहत दी। कोर्ट ने नई बॉन्ड सुनवाई का आदेश दिया। इसके साथ ही, सरकार को स्पष्ट और ठोस साक्ष्य के आधार पर यह साबित करना होगा कि उसके भागने का खतरा है या वह समुदाय के लिए खतरा है। न्यायाधीश ने कहा कि सही सुरक्षा उपायों के बिना लगातार हिरासत में रखना 5वें संशोधन का उल्लंघन है।
कैलिफोर्निया के एक अन्य मामले में कोर्ट ने भवानदीप सिंह ढालीवाल की तत्काल रिहाई का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि उन्हें हिरासत से तत्काल रिहा किया जाए। न्यायाधीश ने अधिकारियों को बिना कानूनी तौर पर सही प्रक्रिया के उसे दोबारा गिरफ्तार करने से भी रोक दिया।
सैन डिएगो के एक अलग मामले में अदालत ने आदेश दिया कि विक्रांत सिंह को उसकी पिछली रिहाई के नियमों और शर्तों के तहत इमिग्रेशन कस्टडी से तुरंत रिहा किया जाए। हालांकि, सभी बंदियों को राहत नहीं मिली।
मिशिगन में कोर्ट ने गुरप्रीत वालिया सिंह की ओर से दायर हैबियस याचिका खारिज कर दी। अदालत ने पाया कि उन्हें पहले ही हिरासत की पुनर्समीक्षा (रीडिटरमिनेशन) मिल चुकी थी। न्यायाधीश ने फैसला दिया कि उनकी हिरासत कानून या संविधान का उल्लंघन नहीं करती।
ओक्लाहोमा की कोर्ट ने एक मजिस्ट्रेट जज की सिफारिश को अपनाया और बॉन्ड न दिए जाने को चुनौती देने वाली पिटीशन को खारिज कर दिया।
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