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‘द कॉम्प्लेक्स’ में करण महाजन ने की प्रवासी पहचान की पड़ताल

लेखक महाजन, ब्राउन यूनिवर्सिटी में लिटरेरी आर्ट्स के एसोसिएट प्रोफेसर हैं। उन्होंने इस 448 पन्नों के उपन्यास पर लगभग एक दशक तक शोध करने के बाद लेखन किया है।

करण महाजन और उनकी किताब द कॉम्पलेक्स / Brown University

भारतीय-अमेरिकी लेखक और ब्राउन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर करण महाजन का नया उपन्यास ‘द कॉम्प्लेक्स’ 10 मार्च को जारी हो रहा है। यह उपन्यास दिल्ली के एक परिवार की कहानी बताता है जिसके कुछ सदस्य अमेरिका जाते हैं और बाद में वापस लौटते हैं। कहानी दिखाती है कि उनका प्रवास पहचान और जुड़ाव को कैसे बदल देता है। इसमें राजनीतिक परिवार की कई पीढ़ियों की कहानी बताई गई है। यह परिवार दिल्ली के एक रिहायशी परिसर से जुड़ा है। कहानी भारत और अमेरिका दोनों जगहों में उनके जीवन को दिखाती है।

लेखक महाजन, ब्राउन यूनिवर्सिटी में लिटरेरी आर्ट्स के एसोसिएट प्रोफेसर हैं। उन्होंने इस 448 पन्नों के उपन्यास पर लगभग एक दशक तक शोध करने के बाद लेखन किया है। उपन्यास के शोध के बारे में महाजन ने ब्राउन यूनिवर्सिटी को बताया कि उन्होंने अमेरिका में शुरुआती भारतीय प्रवासियों के अनुभवों का अध्ययन किया। खासकर उन लोगों का जो 1970 और 1980 के दशक में वहां पहुंचे थे।

ब्राउन यूनिवर्सिटी के अनुसार उस दौर के प्रवासियों की यादों को सुनना और मौखिक इतिहास पढ़ना उन्हें यह समझने में मदद करता है कि उस पीढ़ी ने अपने अनुभवों को कैसे बताया। महाजन के शोध के अनुसार कई शुरुआती प्रवासियों ने भेदभाव को कम किया। उन्होंने ब्राउन यूनिवर्सिटी से कहा कि उदाहरण के लिए शुरुआती पीढ़ी के भारतीय प्रवासी कहते हैं कि हमें कोई नस्लवाद नहीं झेलना पड़ा। 

यह उपन्यास उन लोगों के बीच भावनात्मक तनाव को भी दिखाता है जो विदेश जाते हैं और जो भारत में ही रहते हैं। महाजन ने इसके लिए अपने जीवन के अनुभवों से भी प्रेरणा ली है क्योंकि वह दोनों देशों के बीच रहते रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह उन लोगों के बीच संबंधों को देखता है जो प्रवास करते हैं और जो भारत में रहने का फैसला करते है। उन्होंने कहा कि जब आप विदेश जाकर फिर अपने देश लौटते हैं तो कैसा महसूस होता है? और आप बंटी हुई निष्ठाओं और बंटी हुई पहचान से कैसे निपटते हैं? 

महाजन ने इस उपन्यास के लिए कई देशों में शोध किया। उन्होंने भारत की यात्राएं कीं और ब्राउन यूनिवर्सिटी के सैक्सेना सेंटर फॉर कंटेम्पररी साउथ एशिया के विद्वानों से चर्चा की। उन्होंने 1980 और 1990 के दशक की भारतीय राजनीतिक इतिहास का भी अध्ययन किया। उन्होंने पहले के दशकों में प्रवासियों के सामाजिक अनुभवों को भी पढ़ा ताकि उपन्यास की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि तैयार की जा सके।

बता दें कि महाजन का जन्म कनेक्टिकट के स्टैमफोर्ड में हुआ था। जब वह दो साल के थे तब उनके माता-पिता दिल्ली आ गए और वह वहीं बड़े हुए। उनके पहले उपन्यासों में ‘फैमिली प्लानिंग’ (2008) और ‘द एसोसिएशन ऑफ स्मॉल बॉम्ब्स’ (2016) शामिल हैं। ‘द एसोसिएशन ऑफ स्मॉल बॉम्ब्स’ फिक्शन श्रेणी में नेशनल बुक अवॉर्ड के लिए फाइनलिस्ट रहा था। लंबी लेखन प्रक्रिया पर विचार करते हुए महाजन ने कहा कि उन्होंने ‘द कॉम्प्लेक्स’ पर लगभग 10 साल तक बीच-बीच में काम किया।

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