सांकेतिक... / Unsplash
विशाखापत्तनम के एक भारतीय परिवार ने सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक पोस्ट के बाद सुर्खियां बटोरी हैं। इस पोस्ट में बताया गया है कि कैसे बढ़ते कर्ज और अमेरिका के वीजा नियमों में बदलाव ने अमेरिका में पढ़ रहे उनके दो बेटों के विदेश में नौकरी पाने के सपनों को चौपट कर दिया।
यह कहानी स्थानीय उद्यमी आदित्य राजगढ़िया ने X सोशल मीडिया पर साझा की, जिसमें उन्होंने बताया कि उनके एक करीबी दोस्त ने सीमित संसाधनों के बावजूद दोनों बेटों को अमेरिका में मास्टर्स की पढ़ाई के लिए भेजने के लिए भारी कर्ज लिया। पोस्ट के अनुसार, जब तक उनके बेटे स्नातक हुए, परिवार पर ₹1.5 करोड़ का कर्ज हो चुका था। पिता का छोटा व्यवसाय पहले से ही आर्थिक रूप से परिवार का सहारा देने के कारण दबाव में था।
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वर्ष 2025 में सत्ता परिवर्तन के बाद से अमेरिकी आव्रजन नियमों में सख्ती और नौकरी के अवसरों में कमी आने से स्थिति और भी खराब हो गई। H-1B वीजा, जिसे लंबे समय से छात्र जीवन से पूर्णकालिक रोजगार तक का मार्ग माना जाता था, अब मिलना मुश्किल हो गया है, जबकि शुरुआती स्तर की तकनीकी नौकरियों में गिरावट आई है।
राजगढ़िया ने लिखा कि दोनों बेटे लंबे समय तक बेरोजगार रहे, जिसके चलते उनके पिता को हर महीने भेजी जाने वाली रकम बढ़ानी पड़ी। उन्होंने बताया कि पहले वे उन्हें अंशकालिक आय के साथ-साथ हर महीने 1 लाख रुपये भेजते थे। उनसे अंशकालिक नौकरियां छोड़ने को कहा और हर एक को 2 लाख रुपये भेजने शुरू कर दिए। कर्ज लेते रहने से परिवार का कुल कर्ज बढ़कर 2 करोड़ रुपये हो गया, जिससे वे भुगतान करने के लिए अपना फ्लैट बेचने की कगार पर आ गए।
A close friend of mine sent both his kids to the US in spite of not having the means to do it. By the time their education was done, he had a loan of 1.5 cr.
— Aditya (@vizagobelix) January 17, 2026
Both completed their MS - one 2 years ago and one this year. Didn't get picked in H1B lottery twice.
Earlier, he would… https://t.co/JwrnlmIFp7
राहत हाल ही में मिली। राजगढ़िया ने लिखा- सौभाग्य से, हाल ही में हुई लॉटरी में बड़े बेटे का चयन हो गया, उसे पूर्णकालिक नौकरी मिल गई और भले ही वेतन कम है, कम से कम वह अपना गुजारा चला पा रहा है। इस घटनाक्रम से आर्थिक दबाव कुछ कम हुआ, लेकिन पहले से हुए नुकसान की भरपाई नहीं हुई।
इसे भयानक स्थिति बताते हुए राजगढ़िया ने कहा कि कई परिवार ऐसी ही परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। हमारे लिए यहां बैठकर फैसला सुनाना आसान है, लेकिन युवा बच्चों के लिए यह काफी मुश्किल है। वे एक ऐसे बाजार में फंसे हुए हैं जहां शुरुआती स्तर की नौकरियां बहुत कम उपलब्ध हैं और साथ ही उन पर घर पर एक बड़ा कर्ज भी है जो लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि हजारों भारतीय छात्र और अभिभावक इसी तरह की स्थिति में हैं।
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