रामायण का एक प्रसंग... / रामायण
फिजी की राजधानी सुआ के अलावा नौसोरी और लाबासा में वर्षों से रामलीला रची जाती है। सैकड़ों की तादाद में लोग जुटते हैं और बुराई पर अच्छाई की जय का उत्सव मनाते हैं। शनिवार रात नौसोरी में ऐसा ही आयोजन हुआ।
भारत के उच्चायोग और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद ने श्री सनातन रामायण मंडली के सहयोग से नौसोरी स्थित बाबा राघो विष्णु कुटी में 125वीं रामलीला समारोह (जिसे यहां धारा पार भी कहा जाता है) का आयोजन किया।
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रामलीला की कुछ तस्वीरों के साथ फिजी स्थित उच्चायोग ने सोशल मीडिया पोस्ट एक्स पर इसकी जानकारी देते हुए बताया कि बाबा राघो विष्णु कुटी लंबे समय से आस्था और सांस्कृतिक विरासत के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित है। यह स्थल सेवा, एकता और आध्यात्मिक मूल्यों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ भारत और फिजी की साझा परंपराओं को संरक्षित करने में अहम भूमिका निभा रहा है।
इस आयोजन ने भारत और फिजी के लोगों के बीच मजबूत होते सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को भी प्रदर्शित किया। उच्चायोग के अनुसार, रामलीला का यह 125वां आयोजन दोनों देशों के बीच साझा विरासत, धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक जुड़ाव की निरंतरता का प्रतीक बना।
इसमें संत श्री बाबा राघो दास जी के तप और सनातन धर्म के लिए किए गए उनके प्रयासों को भी याद किया गया। संत श्री बाबा राघो दास जी को फिजी में पूजा जाता है। वो एक पूजनीय आध्यात्मिक गुरु और गिरमिटिया काल के प्रमुख धर्म प्रचारकों में से एक थे। 28 मार्च 1901 को फिजी के नौसोरी स्थित सवानी पहुंचे थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन सनातन धर्म की स्थापना, संरक्षण और उसके मूल्यों के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित किया था।
बाबा राघो दास जी ने फिजी में भारतीय समुदाय के बीच धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनके प्रयासों ने प्रवासी भारतीय समाज में सनातन संस्कृति, रामायण परंपरा और सामुदायिक एकता को बनाए रखने में अहम योगदान दिया। आज भी उन्हें फिजी में भारतीय विरासत और आध्यात्मिक परंपराओं के सम्मानित प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।
फिजी में रामलीला का मंचन वहां के गिरमिटिया पूर्वजों द्वारा शुरू की गई एक जीवित सांस्कृतिक परंपरा है। 100 से अधिक वर्षों से इसे पूरी निष्ठा के साथ मनाया जाता है। भारतीय प्रवासियों ने अपनी संस्कृति को जीवित रखने के लिए सौ साल से भी पहले रामलीला की शुरुआत की थी। नौसोरी स्थित बाबा राघौ विष्णु कुटी और बुलिलेका रामलीला मंदिर इसके प्रमुख और ऐतिहासिक केंद्र हैं।
पारंपरिक रूप से इन दोनों जगहों पर 10 दिनों तक रामलीला का उत्सव मनाया जाता है, जिसमें रामायण के विभिन्न प्रसंगों का मंचन होता है।
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