प्रतीकात्मक तस्वीर / AI image
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में थॉयराइड की समस्या बेहद आम होती जा रही है। पहले यह बीमारी युवाओं में कम देखने को मिलती थी, लेकिन अब बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर उम्र के लोग इससे प्रभावित हो रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह बदलती जीवनशैली, गलत खानपान, तनाव और शारीरिक गतिविधियों की कमी है।
आयुर्वेद और विज्ञान दोनों का मानना है कि थॉयराइड सिर्फ दवाओं से ठीक होने वाली बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर के पूरे संतुलन से जुड़ी समस्या है। अगर हार्मोन को सही रखना है, तो भोजन और आदतों में सुधार करना बेहद जरूरी है।
आयुर्वेद के अनुसार, थॉयराइड की समस्या मुख्य रूप से अग्नि (पाचन शक्ति) और कफ दोष के असंतुलन से जुड़ी होती है। जब पाचन कमजोर होता है, तो शरीर में विषैले तत्व जमा होने लगते हैं, जिससे हार्मोन का संतुलन बिगड़ता है। विज्ञान भी कहता है कि थॉयराइड के मरीजों में मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। ऐसे में कुछ चीजों का ज्यादा सेवन स्थिति को बिगाड़ सकता है। खासतौर पर चीनी, कैफीन और शराब ऐसी चीजें हैं, जिन्हें सीमित करना बहुत जरूरी है।
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आयुर्वेद में अत्यधिक मीठे स्वाद को कफ बढ़ाने वाला माना गया है। ज्यादा चीनी खाने से शरीर भारी हो जाता है, आलस्य बढ़ता है और चर्बी तेजी से जमा होती है। विज्ञान के अनुसार, ज्यादा शुगर इंसुलिन को बिगाड़ती है, जिससे वजन बढ़ता है और शरीर में सूजन आने लगती है। थॉयराइड के मरीजों में पहले से ही वजन बढ़ने की समस्या होती है, ऐसे में मिठाई इस परेशानी को कई गुना बढ़ा देती है। चीनी कम करने से न सिर्फ थॉयराइड संतुलित रहता है, बल्कि डायबिटीज, मोटापा और दिल की बीमारियों का खतरा भी घटता है।
वहीं, आयुर्वेद में कैफीन को शरीर को उत्तेजित करने वाला माना गया है, जो लंबे समय में स्नायु तंत्र और ग्रंथियों को थका देता है। वैज्ञानिक रिसर्च बताती है कि कैफीन थॉयराइड ग्रंथि के काम में बाधा डाल सकता है और दवाइयों के असर को भी कम कर सकता है। सुबह खाली पेट कॉफी पीने से हार्मोन अचानक तेज हो जाते हैं, जिससे बेचैनी और थकान बढ़ती है। कॉफी कम करने से थॉयराइड के साथ-साथ नींद, चिंता और ब्लड प्रेशर की समस्याओं में भी राहत मिलती है।
इसके अलावा, आयुर्वेद में शराब को शरीर के लिए विष समान बताया गया है, जो अग्नि को कमजोर कर देती है। विज्ञान के अनुसार, शराब का सीधा असर लिवर पर पड़ता है। हमारा लिवर ही थॉयराइड हार्मोन को एक्टिव हार्मोन में बदलता है। जब शराब के कारण लिवर कमजोर होता है, तो यह प्रक्रिया सही से नहीं हो पाती और हार्मोनल असंतुलन बढ़ जाता है। शराब छोड़ने से थॉयराइड के साथ-साथ फैटी लिवर, एसिडिटी और मानसिक तनाव में भी सुधार होता है।
थॉयराइड से राहत पाने के लिए आयुर्वेद सादा भोजन करने की सलाह देता है। घर का बना खाना, समय पर भोजन, हल्का व्यायाम, और पर्याप्त नींद हार्मोन को संतुलित रखने में मदद करते हैं। विज्ञान भी मानता है कि जब शरीर को सही पोषण और आराम मिलता है, तो वह खुद को ठीक करने लगता है।
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