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'2 खेत' ने मचाई धूम, NRI संजय अरोड़ा ने बेस्ट डायरेक्टर अवॉर्ड किया अपने नाम

अटलांटा के फिल्म निर्माता संजय अरोड़ा ने अपनी फिल्म '2 खेत' के लिए फ्लोरिडा के साउथ एशियन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट डायरेक्टर का अवॉर्ड जीतकर धूम मचा दी है। यह फिल्म न सिर्फ क्रिटिक्स बल्कि दर्शकों को भी खूब पसंद आ रही है।

 अवॉर्ड के साथ संजय अरोड़ा। फिल्म दो खेत का आधिकारिक पोस्टर। अवॉर्ड के साथ संजय अरोड़ा। फिल्म दो खेत का आधिकारिक पोस्टर। / mage- Sanjay Arora

अटलांटा के फिल्ममेकर संजय अरोड़ा की '2 खेत' फिल्म ने धमाल मचा दिया है। उन्हें फ्लोरिडा के साउथ एशियन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2025 में बेस्ट डायरेक्टर का अवॉर्ड मिला है। इस फिल्म फेस्टिवल का आयोजन पिछले महीने हुआ था। इसमें संजय की फिल्म को उसकी दिल छू लेने वाली कहानी और कमाल के काम के लिए खूब तारीफें मिलीं। '2 खेत' की कहानी मन्नी और उसके भाई की है। इनकी शांत जिंदगी तब उलट-पुलट हो जाती है जब एक अमीर प्रॉपर्टी डीलर एक प्राफिटेबल, लेकिन संदिग्ध ऑफर लेकर आता है। 

'2 खेत' फिल्म का डायरेक्शन जगत जून ने किया है। संजय अरोड़ा इसके एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूर हैं। ये फिल्म क्रिटिक्स और दर्शकों दोनों को खूब पसंद आई है। इस फिल्म को फ्लोरिडा के इस फिल्म फेस्टिवल में जगह मिलना साउथ एशियन सिनेमा और फिल्ममेकर्स के लिए बड़ी बात है। ये फेस्टिवल खास तौर पर साउथ एशियन फिल्मों को दिखाता है।

संजय अरोड़ा सिर्फ '2 खेत' पर ही नहीं रुके। उनकी नई फिल्म 'यू आर अर्ली' भी वहां दिखाई गई। ये फिल्म सिंगापुर के एक प्रोडक्शन हाउस के साथ मिलकर बनाई गई है और इसमें सिंगापुरी कलाकार हैं। दर्शकों ने इस फिल्म को भी अच्छा रिस्पांस दिया। 

संजय अरोड़ा को पहले भी कई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल्स में अवॉर्ड्स मिल चुके हैं। सितंबर 2024 में उनकी फिल्म 'वन्स अपॉन अ टाइम इन लाहौर' ने बॉस्टन के इंडिया इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट फिल्म और बेस्ट एक्टर (शॉर्ट फिल्म) का अवॉर्ड जीता था। इस फिल्म को भी जगत जून ने डायरेक्ट किया था। उनकी और भी कई फिल्में जैसे 'बटरफ्लाई विंग्स', 'वन्स अगेन', और 'एक्सप्रेशन' को कई अवॉर्ड्स मिल चुके हैं।

अभी संजय अपनी अगली फिल्म 'वापसी' पर काम कर रहे हैं, जो अभी प्री-प्रोडक्शन स्टेज में है। 'वापसी' में उन्होंने उम्रदराज माता-पिता की जिंदगी दिखाई है जो अकेले भारत में रहते हैं। उनका इकलौता बेटा विदेश में रहता है। ये फिल्म सक्सेस की असली मायने पर सवाल उठाती है कि क्या सक्सेस सिर्फ प्रोफेशनल अचीवमेंट्स में है या पर्सनल रिलेशनशिप में भी? देखते हैं ये फिल्म कितना धमाका करती है। 

 

 

 

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