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आर्थिक तंगी से जूझ रहा है आधे से अधिक AAPI समुदाय, अध्ययन में खुलासा

यह रिसर्च लाखों लोगों की असली मुश्किलों और चिंताओं के बारे में जानकारी देती है।

 यह अध्ययन TAAF द्वारा शुरू की गई एक नई रिसर्च सीरीज का हिस्सा है।  यह अध्ययन TAAF द्वारा शुरू की गई एक नई रिसर्च सीरीज का हिस्सा है। / TAAF

द एशियन अमेरिकन फाउंडेशन (TAAF) की एक नई राष्ट्रीय स्टडी के अनुसार, पिछले साल आधे से ज्यादा एशियन अमेरिकन और पैसिफिक आइलैंडर (AAPI) वयस्कों को पैसे बचाने या आर्थिक सुरक्षा बनाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। यह स्टडी 'स्टेट ऑफ AAPIs' का हिस्सा है, जो TAAF द्वारा 29 जुलाई को शुरू की गई एक नई रिसर्च सीरीज है। इसका मकसद पूरे अमेरिका में AAPI समुदायों के असल अनुभवों को समझना है।

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इस पहल की शुरुआत एक राष्ट्रीय रिपोर्ट और न्यूयॉर्क शहर की बरो-लेवल (इलाके के स्तर पर) स्टडी के साथ हुई है। इसे लॉस एंजिलिस, सैन फ्रांसिस्को और सिएटल जैसे बड़े शहरों में रिसर्च को आगे बढ़ाने के लिए 2 मिलियन डॉलर से ज्यादा की फंडिंग मिली है।

TAAF के CEO नॉर्मन चेन ने कहा कि अक्सर AAPIs को एक जैसा (मोनोलिथ) और 'मॉडल माइनॉरिटी' (आदर्श अल्पसंख्यक) माना जाता है। यह रिसर्च लाखों लोगों की असली मुश्किलों और चिंताओं के बारे में जानकारी देती है।

उन्होंने आगे कहा कि अपनी 'स्टेट ऑफ AAPIs' रिसर्च सीरीज के जरिए, हम AAPIs की जरूरतों को बारीकी से समझने और स्थानीय व राष्ट्रीय फैसला लेने वालों को वह डेटा देने का अहम कदम उठा रहे हैं, जिसकी उन्हें हमारे समुदाय की सबसे बड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए जरूरत है।

आर्थिक मुश्किलें
हालांकि एशियन अमेरिकन्स को अक्सर आर्थिक रूप से सफल माना जाता है, लेकिन रिपोर्ट में AAPI समुदायों के बीच काफी आर्थिक असमानताएं पाई गईं। कुल मिलाकर, 51 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें पिछले साल पैसे बचाने या आर्थिक सुरक्षा बनाने में मुश्किल हुई। यह आंकड़ा नेटिव हवाईयन और पैसिफिक आइलैंडर्स में 62 प्रतिशत, वियतनामी लोगों में 61 प्रतिशत, कोरियाई लोगों में 60 प्रतिशत और फ़िलिपिनो लोगों में 58 प्रतिशत था।

इसके अलावा, 43 प्रतिशत लोगों को खाना, घर और यूटिलिटीज (बिजली-पानी जैसी सुविधाएं) जैसी जरूरी चीजों के लिए पैसे चुकाने की चिंता थी, 37 प्रतिशत लोगों की आमदनी में भारी रुकावट आई, और 31 प्रतिशत लोगों को सुरक्षित और स्थिर घर पाने में मुश्किल हुई। लगभग 30 प्रतिशत लोगों को पिछले साल सरकारी या सामुदायिक मदद मिली, जबकि 28 प्रतिशत लोगों ने उन फायदों को पाने में मुश्किल होने की बात कही।

सुरक्षा और अपनापन
रिपोर्ट में पाया गया कि आर्थिक चुनौतियों के साथ-साथ भेदभाव और अपनेपन की भावना को लेकर भी लगातार चिंताएं बनी हुई थीं। 54 प्रतिशत से ज्यादा लोगों ने कहा कि पिछले साल उन्हें अपनी नस्ल या जातीयता के कारण किसी न किसी तरह के भेदभाव का सामना करना पड़ा। इनमें अंग्रेजी न बोल पाने का अंदाजा लगाया जाना, सार्वजनिक जगहों पर शक की नजर से देखा जाना या पुलिस द्वारा अनुचित व्यवहार का सामना करना शामिल था। 

54 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उन्होंने अपनी जाति, मूल-वंश, इमिग्रेशन स्टेटस या दिखावट से जुड़ी चिंताओं के कारण अपने रोजमर्रा के व्यवहार में बदलाव किया है। जैसे कि कुछ इलाकों में जाने से बचना, पहचान-पत्र साथ रखना, या ऐसी जगहों पर न जाना जहां पुलिस या इमिग्रेशन अधिकारी मौजूद हों।

आगे की बात करें तो, 52 प्रतिशत लोगों का मानना ​​था कि अगले पांच सालों में उनके साथ भेदभाव या नस्लीय आधार पर गलत व्यवहार (racial profiling) होने की संभावना है, जबकि 37 प्रतिशत लोगों को नफरत से प्रेरित हमले का शिकार होने का डर था। वियतनामी, कोरियाई, और मूल हवाईयन और प्रशांत द्वीप समूह के लोगों ने सबसे ज्यादा चिंता जताई।

इन चिंताओं के बावजूद, 65 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें अमेरिकी होने पर बहुत गर्व है, जबकि 76 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें AAPI होने पर गर्व है। साथ ही, हर पांच में से एक से लेकर हर चार में से एक व्यक्ति ने वोटिंग की जानकारी, इमिग्रेशन सेवाओं या अंग्रेजी भाषा में मदद पाने में मुश्किलों की बात कही; युवा, कम आय वाले, विदेश में जन्मे और कम पढ़े-लिखे लोगों को ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

TAAF ने कहा कि इन नतीजों का इस्तेमाल उसके 'TAAF सिटीज' प्रोग्राम में किया जाएगा। यह प्रोग्राम शहर-स्तर की रिसर्च का इस्तेमाल करके सरकारों, बिजनेस, नॉन-प्रॉफिट और कम्युनिटी संगठनों को ऐसी नीतियां बनाने में मदद करेगा जिनसे AAPI समुदायों के लिए आर्थिक मौके, सुरक्षा और अपनापन बेहतर हो सके।

यह रिपोर्ट 1,500 AAPI वयस्कों के राष्ट्रीय स्तर के सर्वे पर आधारित है, जो 17 अप्रैल से 11 मई के बीच पांच भाषाओं में किया गया था। रिसर्च करने वालों ने कहा कि इस स्टडी का मकसद 2.6 करोड़ से ज्यादा लोगों की आबादी के बारे में ज्यादा बारीक जानकारी देना है। इस आबादी में 50 से अधिक जातीय समूह और 100 से ज्यादा भाषाएं बोलने वाले लोग शामिल हैं। ऐसे समुदाय जिन्हें रिसर्च और पॉलिसी बनाने में अक्सर एक ही डेमोग्राफिक (जनसांख्यिकीय समूह) माना जाता है।

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