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एला गांधी और अनीता बोस ने GOPIO वेबिनार में महिलाओं की चुनौतियों पर की चर्चा

‘इंडियन डायस्पोरा वूमेन: लीडिंग एंड ट्रांसफॉर्मिंग द सोशल, एजुकेशनल, पॉलिटिकल एंड कॉर्पोरेट स्फीयर्स’ शीर्षक वाले इस वेबिनार का आयोजन GOPIO की महिला परिषद ने किया।

एला गांधी और अनीता बोस / Wikimedia commons

महात्मा गांधी की पोती एला गांधी और सुभाष चंद्र बोस की बेटी अनीता बोस ने 14 मार्च को ग्लोबल ऑर्गनाइजेशन ऑफ पीपल ऑफ इंडियन ओरिजिन यानी GOPIO द्वारा आयोजित वेबिनार में महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की।

‘इंडियन डायस्पोरा वूमेन: लीडिंग एंड ट्रांसफॉर्मिंग द सोशल, एजुकेशनल, पॉलिटिकल एंड कॉर्पोरेट स्फीयर्स’ शीर्षक वाले इस वेबिनार का आयोजन GOPIO की महिला परिषद ने किया। इसमें दक्षिण अफ्रीका, जर्मनी, भारत, मॉरीशस, यूनाइटेड किंगडम, कैरेबियन, अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से प्रतिभागियों ने भाग लिया। वेबिनार का संचालन GOPIO महिला परिषद की अध्यक्ष चारु शिवकुमार ने किया। उन्होंने प्रवासी महिलाओं को नेटवर्किंग, शिक्षा और नेतृत्व विकास के माध्यम से सशक्त बनाने के मिशन के बारे में बताया।

कार्यक्रम की मॉडरेटर डॉ. नीरजा अरुण गुप्ता ने 'गिव टू गेन' विषय पर जोर दिया और मुख्य वक्ताओं का परिचय कराया। इनमें दक्षिण अफ्रीका की शांति कार्यकर्ता और पूर्व राजनेता एला गांधी और ऑस्ट्रियाई अर्थशास्त्री प्रोफेसर अनीता बोस शामिल थीं।

मुख्य अतिथि एला गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में अपने राजनीतिक अनुभव साझा किए। उन्होंने महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के ऐतिहासिक संघर्ष और लोकतांत्रिक सुधारों में उनकी भागीदारी पर बात की। उन्होंने कहा कि आज भी महिलाएं काम, घर और बच्चों की जिम्मेदारियों के तिहरे बोझ का सामना करती हैं और लैंगिक समानता के लिए समाज में बदलाव जरूरी है।

प्रोफेसर अनीता बोस ने यूरोप में एक आधी भारतीय विद्वान के रूप में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने सांस्कृतिक पहचान और लैंगिक समानता से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने शिक्षा में हुई प्रगति का उल्लेख किया, लेकिन पेशेवर क्षेत्र में अब भी मौजूद बाधाओं की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने अपने पिता नेताजी सुभाष चंद्र बोस के महिलाओं के अधिकारों पर विचार भी साझा किए। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय सेना की पहली महिला नेता कैप्टन लक्ष्मी सहगल का उदाहरण दिया।

कनेक्टिकट की स्टेट सीनेटर प्रोफेसर सुजाता गडकर-विलकॉक्स ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि एक भारतीय अमेरिकी और एशियाई अमेरिकी महिला के रूप में राजनीति में उन्हें किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि पितृसत्ता और सांस्कृतिक मानदंड महिलाओं के लिए राजनीति में बाधाएं पैदा करते हैं।

कार्यक्रम में NVIDIA की बोर्ड सदस्य डॉ. आरती शाह, गुजरात यूनिवर्सिटी की कुलपति डॉ. नीरजा गुप्ता और पेजेंट डायरेक्टर रुचिका अरोड़ा ने भी अपने विचार रखे। अंत में GOPIO के अंतरराष्ट्रीय महासचिव सिद्धार्थ जैन ने धन्यवाद ज्ञापन दिया और सभी वक्ताओं, नेतृत्व और विभिन्न चैप्टरों से जुड़े सदस्यों की सराहना की।

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