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कोलंबस से सिनसिनाटी तक, 'राग बसंत' के रंग में रंगे ओहियो के सिख श्रद्धालु

आयोजकों के अनुसार, इस भव्य आयोजन का प्राथमिक उद्देश्य समुदाय को सिख कीर्तन परंपरा की समृद्ध विरासत से परिचित कराना और रागों के आध्यात्मिक महत्व को समझाना था।

भक्ति संगीत कार्यक्रम / Courtesy: Gurdwara Sikh Society of Dayton

अमेरिका के ओहियो राज्य स्थित डेटन के एक सिख गुरुद्वारे में 23 फरवरी को एक विशेष भक्ति संगीत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 8 घंटे तक चले इस "राग बसंत कीर्तन दरबार" में डेटन के स्थानीय सिख समुदाय के साथ-साथ कोलंबस और सिनसिनाटी जैसे पड़ोसी शहरों की संगतों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस कार्यक्रम में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, लगभग 45 कीर्तनकारों ने सिख धर्मग्रंथों में निहित शास्त्रीय राग परंपरा के अनुसार भजनों (शबद) का गायन किया।

आयोजकों के अनुसार, इस भव्य आयोजन का प्राथमिक उद्देश्य समुदाय को सिख कीर्तन परंपरा की समृद्ध विरासत से परिचित कराना और रागों के आध्यात्मिक महत्व को समझाना था। कोलंबस गुरुद्वारा साहिब से आए कुलवंत सिंह ने संगत को 'गुरमत संगीत' के बारे में विस्तार से जानकारी दी। 

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उन्होंने समझाया कि पारंपरिक सिख पद्धति में राग केवल सजावटी तत्व नहीं हैं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुशासन हैं जो मन को परमात्मा से जोड़ते हैं। उन्होंने स्वयं भी दरबार में कीर्तन कर संगत को निहाल किया।

कार्यक्रम की झलकियां / Image Provided

डेटन गुरुद्वारे के मुख्य ग्रंथी हेम सिंह और प्रेम सिंह ने भी कीर्तन पाठ किया और दूर-दराज के शहरों से आए श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया। पूरे आयोजन के दौरान 'गुरु का लंगर' अटूट रूप से जारी रहा, जिसने समानता, सेवा और साझा भक्ति के सिख सिद्धांतों को और मजबूती दी। 

डेटन, सिनसिनाटी और कोलंबस की संगतों का यह मिलन न केवल साझा भक्ति का प्रतीक रहा, बल्कि इसने आपसी समझ और सामुदायिक सद्भाव को बढ़ावा देने की दिशा में एक सामूहिक प्रयास को भी दर्शाया।

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