अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर / X/@USTradeRep
अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने प्रतिनिधियों से कहा कि भारत अभी भी अमेरिका के लिए व्यापार के लिहाज से सबसे कठिन बाजारों में से एक है। उन्होंने बताया कि दोनों देश व्यापार समझौते की दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन खासकर खेती और बाजार तक पहुंच को लेकर अभी भी कई दिक्कतें बनी हुई हैं।
हाउस वेज एंड मीन्स समिति के सामने ग्रीर ने साफ कहा कि भारत को समझौते के लिए तैयार करना आसान नहीं है। उनका कहना था कि भारत ने अपने कृषि बाजार को लंबे समय से सुरक्षित रखा है।
यह बात तब सामने आई जब अमेरिका में खेती से जुड़े उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने पर चर्चा हो रही थी। अमेरिका भारत में डीडीजीएस (डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स), सोयाबीन मील और एथेनॉल जैसे उत्पादों के लिए बड़े मौके देख रहा है।
ग्रीर ने यह भी बताया कि इस हफ्ते भारतीय व्यापार अधिकारी अमेरिका के वाशिंगटन में बातचीत के लिए मौजूद थे और दोनों देशों के बीच एक बड़े द्विपक्षीय समझौते के तहत बातचीत जारी है।
बुधवार को भारत के वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम ने अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि और प्रशासन के अन्य अधिकारियों के साथ अपनी ताजा बातचीत पूरी की।
हालांकि बातचीत आसान नहीं है, फिर भी ग्रीर का मानना है कि कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहां दोनों देश सहमति बना सकते हैं। खासकर वहां, जहां भारत के अंदरूनी हित ज्यादा प्रभावित नहीं होते। उन्होंने डीडीजीएस को ऐसे ही एक संभावित क्षेत्र के रूप में बताया।
भारत लंबे समय से खेती के क्षेत्र में ऊंचे टैक्स और दूसरे प्रतिबंध लगाए हुए है। यह क्षेत्र भारत में बहुत संवेदनशील माना जाता है क्योंकि यह ग्रामीण लोगों की रोजी-रोटी से जुड़ा है। इसी वजह से अमेरिकी नेता कई बार शिकायत कर चुके हैं कि उनके कृषि उत्पादों को भारत में आसानी से जगह नहीं मिलती।
ग्रीर ने यह भी कहा कि अमेरिका की व्यापार नीति का मकसद बराबरी (रेसिप्रोसिटी) है। यानी जो देश अमेरिका के बाजार का फायदा उठाते हैं, उन्हें भी अपने बाजार खोलने चाहिए।
बैठक में प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि भारत ने कुछ उत्पादों पर पहले टैक्स कम किए हैं, लेकिन अभी और बड़े बदलाव की जरूरत है। इस पर ग्रीर ने कहा कि बातचीत इसी दिशा में हो रही है, लेकिन भारत की पुरानी नीतियों के कारण इसमें समय लगेगा।
अमेरिका चाहता है कि उसके कृषि और औद्योगिक उत्पादों को भारत में ज्यादा मौका मिले। वहीं भारत अपनी सेवाओं और अपने निर्यात के लिए बेहतर बाजार पहुंच की मांग कर सकता है।
पिछले 10 सालों में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार लगातार बढ़ा है। इस वजह से भारत अब अमेरिका का एक अहम रणनीतिक और आर्थिक साझेदार बन गया है, खासकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में। हालांकि, टैक्स, डिजिटल व्यापार और खेती से जुड़े मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच समय-समय पर तनाव भी देखने को मिलता रहा है।
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