ADVERTISEMENT

ADVERTISEMENT

US जाएंगे भारत के उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, ट्रेड डील को लेकर बातचीत तेज

पिछले महीने 25 से 29 अगस्त तक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का भारत दौरा होना था, लेकिन बातचीत अटकने की वजह से वह टल गया।

 भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल / Reuters

भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 22 सितंबर को अमेरिका के वॉशिंगटन दौरे पर जा रहे हैं, जहाँ उनका मकसद लंबे समय से अटकी ट्रेड डील पर बातचीत को आगे बढ़ाना है। सरकारी बयान के मुताबिक, भारतीय प्रतिनिधिमंडल का लक्ष्य बातचीत को आगे बढ़ाना है ताकि जल्दी से जल्दी दोनों देशों के बीच एक फायदेमंद समझौते पर पहुंचा जा सके।

दरअसल, 16 सितंबर को अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में भारत के अधिकारियों से मुलाकात की थी। इस बैठक में अमेरिका की ओर से ब्रेंडन लिंच, असिस्टेंट यूएस ट्रेड रिप्रेज़ेंटेटिव (साउथ एंड सेंट्रल एशिया) और भारत की ओर से चीफ़ नेगोशिएटर राजेश अग्रवाल मौजूद थे।

भारत ने कहा कि मंगलवार को हुई ट्रेड मीटिंग पॉज़िटिव और आगे बढ़ने वाली रही, खासकर तब जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में सख्त टैरिफ़ फैसलों के बाद थोड़े नरम रुख का संकेत दिया है।

यह भी पढ़ें- H-1B वीजा पर ट्रम्प के फैसले से भारतीयों में डर, HAF ने मांगा स्पष्टीकरण

हालांकि, यह साफ नहीं है कि इस दौरे में भारत H-1B वीज़ा पर लगे नए $100,000 सालाना शुल्क या फिर रूस से तेल खरीद में कटौती जैसे मुद्दों पर भी चर्चा करेगा या नहीं। अमेरिका लंबे समय से भारत से यह भी चाहता है कि वह अपने कृषि और डेयरी सेक्टर को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोले।

H1B वीजा फीस पर ट्रम्प की सख्ती
गौरतलब है कि ट्रम्प प्रशासन ने शुक्रवार को आदेश जारी किया कि कंपनियों को हर H-1B वीज़ा के लिए अब सालाना $100,000 फीस देनी होगी। यह फैसला भारत के आईटी सेक्टर को सीधा झटका देने वाला माना जा रहा है। इसके अलावा, ट्रम्प ने पिछले महीने भारतीय आयात पर 25% अतिरिक्त टैरिफ भी लगा दिए थे, जिससे अब कुल ड्यूटी 50% तक पहुँच गई है। यह दबाव रूस पर अमेरिका के दबाव अभियान का हिस्सा है।

पिछले महीने 25 से 29 अगस्त तक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का भारत दौरा होना था, लेकिन बातचीत अटकने की वजह से वह टल गया। वजह रही भारत का अमेरिकी कृषि और डेयरी बाजार खोलने से इंकार।

इस बीच, भारत के अमेरिकी निर्यात में भी गिरावट दर्ज हुई है। अगस्त में भारत का निर्यात घटकर 6.86 अरब डॉलर रह गया, जबकि जुलाई में यह 8.01 अरब डॉलर था। एक्सपोर्टर्स का कहना है कि टैरिफ़ का असली असर सितंबर से दिखेगा, जब नए शुल्क पूरी तरह लागू होंगे।

Comments

Leave A Comment

Required fields are marked (*).

Related

Talk to us?