बाजार में झटका / Canva
अमेरिका और यूएई स्थित निवेश कंपनी पेप्टोमिस्ट एलएलसी के संस्थापक जयेश चंद्र गुप्ता ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में संभावित उथल-पुथल को लेकर नई चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी का आंतरिक भौतिकी-आधारित गणितीय मॉडल 15 मई की शुरुआत के आसपास बाजार में बड़े तनाव का संकेत दे रहा है।
इंडिया अब्रॉड को दिए एक साक्षात्कार में गुप्ता ने कहा कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, ऊंचे बाजार मूल्यांकन और ऊर्जा व कर्ज बाजारों में बढ़ती अस्थिरता के कारण अमेरिकी शेयर बाजार में 20 से 25 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। उन्होंने कहा कि हम ऐसे चरण में प्रवेश कर रहे हैं जहां एक बड़ी बाजार गिरावट देखने को मिल सकती है। आने वाले कुछ महीनों में 20 से 25 प्रतिशत तक की अच्छी-खासी गिरावट हो सकती है।
इस चेतावनी के केंद्र में पेप्टोमिस्ट का अपना विशेष गणितीय ढांचा है, जिसे गुप्ता भौतिकी के सिद्धांतों पर आधारित बताते हैं। उन्होंने कहा कि यह ढांचा उनके पहले के शोध से विकसित हुआ है जो सीएमटी एसोसिएशन की जर्नल ऑफ टेक्निकल एनालिसिस में प्रकाशित हुआ था। उस शोध में दुबई स्थित गुप्ता ने शेयर कीमतों की भविष्यवाणी में भौतिकी आधारित सिद्धांतों के उपयोग को समझाया था।
सिर्फ चार्ट और कीमतों पर आधारित सामान्य ट्रेडिंग मॉडल से अलग पेप्टोमिस्ट का कहना है कि उसका मॉडल वित्तीय बाजारों को एक गतिशील बल प्रणाली की तरह देखता है जिसे नकदी प्रवाह, अस्थिरता, गति और निवेशकों की मनोवृत्ति प्रभावित करती है।
पेप्टोमिस्ट का दावा है कि उसका यह आंतरिक मॉडल पहले भी कई बड़े बाजार तनाव काल से मेल खा चुका है। इनमें 2016 की गिरावट, 2018 का बाजार संकट, 2020 का कोविड-जनित क्रैश और 2022 की मंदी शामिल हैं। कंपनी का कहना है कि यही मॉडल अब इस सप्ताह से फिर नई उथल-पुथल का संकेत दे रहा है।
गुप्ता का मानना है कि मौजूदा बाजार स्थिति असली आर्थिक बुनियाद से काफी दूर जा चुकी है। उन्होंने कहा कि यह तेजी मजबूत आर्थिक बदलाव के कारण नहीं, बल्कि कॉल ऑप्शन खरीदने की वजह से है। अब समय सावधान रहने का है और अपनी मेहनत की कमाई को बचाने का है।
गुप्ता के अनुसार छोटे निवेशकों द्वारा तेजी से कॉल ऑप्शन खरीदने से गामा स्क्वीज जैसी स्थिति बन गई है। इससे मार्केट मेकर्स को असली शेयर खरीदने पड़ते हैं, जिससे बाजार सूचकांक और ऊपर चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस समय हम दो तरफा जोखिम वाले दौर में हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर निवेशकों की सोच बदली, तो यही डेरिवेटिव्स आधारित तेजी नुकसान को बहुत तेजी से बढ़ा सकती है। गुप्ता ने बताया कि पेप्टोमिस्ट ने अपनी रणनीति को सुरक्षित रखते हुए सरकारी बॉन्ड, अस्थिरता से जुड़े सौदे और लंबी अवधि की हेजिंग रणनीतियों को चुना है।
उन्होंने कहा कि इस समय हमें सबसे सुरक्षित विकल्प बॉन्ड लगते हैं क्योंकि उनकी यील्ड बहुत ऊंची है। गुप्ता ने यह भी कहा कि मध्य पूर्व का संघर्ष ऊर्जा बाजारों और महंगाई पर गहरा असर डाल रहा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य का रुकना एक बहुत बड़ा खतरा है खासकर उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए। तेल आयात करने वाले देशों, खासकर भारत सहित एशियाई देशों को सबसे ज्यादा चिंता होगी।
उन्होंने कहा कि कच्चे तेल, एलएनजी, डीजल और खाद की कमी आगे चलकर खाद्य महंगाई और मुद्रा पर दबाव को बढ़ा सकती है। यूक्रेन और मध्य पूर्व के युद्ध लगातार महंगाई, ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और आर्थिक विकास की धीमी रफ्तार के कारण वैश्विक बाजार पहले से ही अस्थिर बने हुए हैं।
भारत जो दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में से एक है, ऊर्जा कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से खास तौर पर प्रभावित हो सकता है।
इंडिया अब्रॉड ने पेप्टोमिस्ट के निजी मॉडल, अनुमान या भविष्यवाणी पद्धति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है।
पेप्टोमिस्ट ने कहा कि बाजार को लेकर उसके विचार और अनुमान पूरी तरह उसके अपने हैं और इन्हें निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए।
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
Comments
Start the conversation
Become a member of New India Abroad to start commenting.
Sign Up Now
Already have an account? Login