सबीर भाटिया। / X
हॉटमेल के भारतीय-अमेरिकी को-फाउंडर सबीर भाटिया ने 29 जुलाई को X पर कई पोस्ट में भारत के बिजनेस माहौल की आलोचना की। उन्होंने भारत के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की तुलना अमेरिका से की और कहा कि बहुत ज्यादा कंप्लायंस की जरूरतों की वजह से एंटरप्रेन्योरशिप, इनोवेशन और विदेशी निवेश को बढ़ावा नहीं मिल पाता।
भाटिया ने कहा कि भारत में बिजनेस शुरू करने की अपनी कोशिशों से उन्हें यह नजरिया मिला। उन्होंने लिखा कि 2014 में उन्होंने भारत में 'स्ट्राइप' (Stripe) जैसी कंपनी शुरू करने की कोशिश की थी, लेकिन 2017 तक यह वेंचर फेल हो गया। उन्होंने इसकी वजह 'रेगुलेटरी कोलेस्ट्रॉल' को बताया।
भाटिया ने लिखा कि हर अरबों डॉलर की कंपनी की शुरुआत एक आइडिया से हुई। एक ऐसा आइडिया जो मौजूदा नियमों में आसानी से फिट नहीं बैठता था। स्ट्राइप का जिक्र करते हुए उन्होंने आगे कहा कि आज इसकी वैल्यूएशन लगभग 160 अरब डॉलर है। 2014 में, मैंने भारत में ऐसा ही बिजनेस बनाने की कोशिश की थी। 2017 तक, रेगुलेटरी कोलेस्ट्रॉल के बोझ तले यह बिजनेस बंद हो गया।
Every company worth hundreds of billions of dollars began as an idea—an idea that didn’t fit neatly into existing regulations.
— Sabeer Bhatia (@sabeer) July 29, 2026
Take Stripe. Today it’s valued at around $160B.
In 2014, I tried building a similar business in India. By 2017, it had died under the weight of…
उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि लोग पूछते हैं कि मैं भारत में बिजनेस क्यों नहीं बना रहा हूं। यह रहा उसका जवाब। अमेरिका में, मैं 24 घंटे में बिजनेस शुरू कर सकता हूं और 48 घंटे में उसे बंद कर सकता हूं। बिना किसी सवाल-जवाब के। भारत में, बिजनेस कानूनों में जेल की सजा वाले 26,134 प्रावधान हैं। इसे 'रेगुलेटरी कोलेस्ट्रॉल' कहा जाता है।
भाटिया ने यह भी सवाल उठाया कि क्या ऐसे नियम विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) को हतोत्साहित कर रहे हैं। उन्होंने लिखा कि और कोई भी सोच सकता है कि भारत FDI को आकर्षित क्यों नहीं कर पा रहा है।
'ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन' की एक रिपोर्ट- 'Jailed for Doing Business: The 26,134 Imprisonment Clauses in India's Business Laws'- का हवाला देते हुए भाटिया ने कहा कि भारत में 1,536 आर्थिक कानून हैं और उनमें से आधे में जेल की सजा का प्रावधान है।
उन्होंने लिखा कि भारत दुनिया की एंटरप्रेन्योरियल कैपिटल (उद्यमिता की राजधानी) बनने का सपना देखता है, फिर भी एंटरप्रेन्योर सामान्य नियमों के पालन में चूक के लिए आपराधिक कार्रवाई के लगातार डर के साये में काम करते हैं। जब इनोवेशन के लिए प्रोत्साहन के बजाय जेल की सजा मिल सकती है, तो कम लोग जोखिम उठाते हैं।
भाटिया ने तर्क दिया कि जुर्माना प्रक्रियात्मक उल्लंघनों के बजाय धोखाधड़ी पर केंद्रित होना चाहिए। आप एंटरप्रेन्योर्स को कानून से डराकर स्टार्टअप नेशन नहीं बना सकते। आप उन पर भरोसा करके और धोखाधड़ी के लिए सजा देकर इसे बनाते हैं, न कि कागजी कार्रवाई के लिए।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या सामान्य नियमों के पालन में चूक के लिए आपराधिक सजा भारत की एंटरप्रेन्योरियल महत्वाकांक्षाओं को कमजोर कर सकती है। उन्होंने लिखा कि सिलिकॉन वैली एंटरप्रेन्योर्स के इर्द-गिर्द बनी थी। इसने 50 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की संपत्ति और लाखों नौकरियां पैदा की हैं।
ये पोस्ट भाटिया की उन पिछली टिप्पणियों के बाद आए हैं जिनमें उन्होंने 2012 में भारत में बुक किए गए एक अपार्टमेंट का कब्जा मिलने में हुई देरी का जिक्र किया था। उन्होंने इसे देश में बिजनेस करने में आने वाली चुनौतियों का एक और उदाहरण बताया है।
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