India Spain / X@PiyushGoyal
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्पेन के उद्योग और पर्यटन मंत्री जॉर्डी हेरेउ से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने व्यापार, निवेश, मैन्युफैक्चरिंग, इनोवेशन, पर्यटन और भविष्य के लिए तैयार अन्य क्षेत्रों में भारत-स्पेन सहयोग को मजबूत करने के नए अवसरों पर चर्चा की। अर्थव्यवस्था के यह मुख्य क्षेत्र विकास, प्रतिस्पर्धा और रोजगार पैदा करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
गोयल ने कहा कि हमने भारत-ईयू एफटीए पर भी चर्चा की और दोनों देशों के आपसी फायदे के लिए औद्योगिक साझेदारी को मजबूत करने, मजबूत सप्लाई चेन बनाने और आर्थिक सहयोग को गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।
इससे पहले केंद्रीय मंत्री ने कहा था कि भारत और स्पेन को अगले 10 सालों में अपने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को 10 गुना बढ़ाने पर विचार करना चाहिए। गोयल ने कहा कि एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, मोबिलिटी, रेलवे, सस्टेनेबिलिटी, इनोवेशन, कला, विज्ञान और संस्कृति कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें भारत और स्पेन के बीच बेहतर सहयोग हो सकता है।
गोयल ने कहा कि इंडिया-स्पेन बिजनेस फोरम में मुख्य भाषण देते हुए मुझे खुशी हो रही है। मैंने हमारे व्यापार और निवेश संबंधों में जबरदस्त बढ़ोतरी हासिल करने के लिए भारत और स्पेन के बीच सामान और सेवाओं के मुक्त प्रवाह को बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए चार तरीके सुझाए, जिसमें एक-दूसरे के भविष्य में ज्यादा और व्यापक निवेश करना, भारत-ईयू एफटीए से मिलने वाले सभी मौकों का फायदा उठाना, पर्यटन और टैलेंट को जोड़ना और सरकार-से-सरकार के संबंधों को और मजबूत करना शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत-ईयू एफटीए के लागू होने से भारत और ईयू के लिए बहुत सारे मौके खुलेंगे।
मैड्रिड में कारोबारियों और नेताओं से बात करते हुए गोयल ने कहा कि शायद यह एकमात्र ऐसा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट है जिसे यूरोप ने किसी भी सदस्य देश की आलोचना के बिना अंतिम रूप दिया है। भारत के साथ इस साझेदारी में सभी 27 सदस्य देश पूरी तरह सहमत हैं, और भारत में भी कारोबारियों की यही राय है देश में कहीं से भी कोई विरोध या असंतोष की बात नहीं सुनी गई।
ईयू और भारत मिलकर वैश्विक व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा हैं। इनमें व्यापार, कारोबार, निवेश, संस्कृति, शिक्षा, पर्यटन, टेक्नोलॉजी, अंतरिक्ष और रक्षा के क्षेत्रों में आपसी सहयोग को और ऊंचे स्तर पर ले जाने की क्षमता है।
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