अदाणी समूह / IANS
अदाणी ग्रुप की प्रमुख कंपनी अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (एपीएसईजेड) ने मंगलवार को कहा कि उसकी समुद्री क्षेत्र की सब्सिडियरी एस्ट्रो ऑफशोर ने अमेरिका की इंजीनियरिंग और एप्लाइड टेक्नोलॉजी कंपनी ओशनियरिंग इंटरनेशनल इंक. के साथ साझेदारी की है। इस समझौते का उद्देश्य अल्ट्रा-डीपवॉटर और सबसी ऑपरेशंस में विस्तार करना है, जिसे कंपनी की वैश्विक ऑफशोर ग्रोथ रणनीति में बड़ा कदम माना जा रहा है।
दोनों कंपनियों के बीच हुआ यह समझौता यूरोप में विशेष ऑफशोर अवसरों का लाभ उठाने और जटिल सबसी इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स में क्षमताओं को मजबूत करने के लिए किया गया है, जिसमें अंडरवॉटर कंस्ट्रक्शन, पाइपलाइन इंस्टॉलेशन, निरीक्षण और रखरखाव जैसे काम शामिल हैं।
यह कदम एपीएसईजेड की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत कंपनी लॉजिस्टिक्स, ऑफशोर सपोर्ट सर्विसेज और डीपवॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर सॉल्यूशंस को मिलाकर एक वैश्विक समुद्री प्लेटफॉर्म तैयार करना चाहती है।
अपने विस्तार अभियान के तहत एस्ट्रो ऑफशोर ने अपना पहला अल्ट्रा-डीपवॉटर जहाज 'एस्ट्रो ऑफशोर' शामिल किया है। इससे कंपनी की आधुनिक तकनीक और हाई-स्पेसिफिकेशन वाले नए बेड़े को मजबूत करने की रणनीति को बल मिलेगा।
एपीएसईजेड के पूर्णकालिक निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अश्वनी गुप्ता ने कहा कि यह साझेदारी कंपनी के वैश्विक स्तर पर विविधीकृत समुद्री प्लेटफॉर्म बनाने के लक्ष्य को समर्थन देती है।
उन्होंने कहा कि एस्ट्रो ऑफशोर के आधुनिक जहाजों और ओशनियरिंग की डीपवॉटर इंजीनियरिंग तथा आरओवी विशेषज्ञता को मिलाकर कंपनी जटिल ऑफशोर ऑपरेशंस में अपनी क्षमताएं बढ़ा रही है और यूरोप में भी विस्तार कर रही है।
एस्ट्रो ऑफशोर के सीईओ मार्क हम्फ्रीज ने कहा कि एस्ट्रो एटलस के जुड़ने से कंपनी की अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षमताएं और मजबूत हुई हैं। इससे कंपनी ऑफशोर क्षेत्र की व्यापक जरूरतों को पूरा कर सकेगी।
उन्होंने कहा, "यह अब तक हमारा सबसे बड़ा और सबसे सक्षम जहाज है, जो हमें जटिल ऑफशोर ऑपरेशंस को बेहतर तरीके से संभालने और ग्राहकों की बदलती जरूरतों के अनुसार सेवाएं देने में मदद करेगा।"
इसके अलावा, 97 मीटर लंबा डीपी2 मल्टीपर्पज सपोर्ट वेसल (पूर्व नाम एनर्जी सवाना) अत्याधुनिक सबसी सिस्टम से लैस है। इसमें 150 टन क्षमता वाली क्रेन, दूसरी क्रेन, मूनपूल और 100 लोगों तक के रहने की सुविधा मौजूद है।
कंपनी ने बताया कि यह जहाज 3,000 मीटर से अधिक गहराई वाले समुद्री क्षेत्रों में काम करने में सक्षम है।
यह साझेदारी ऐसे समय में हुई है जब एपीएसईजेड अपने समुद्री कारोबार को वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ाने की दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रही है। कंपनी का लक्ष्य वित्त वर्ष 2031 तक 200 जहाजों का बेड़ा तैयार करना, समुद्री कारोबार से 6,000 करोड़ रुपए का राजस्व हासिल करना और 13,000 करोड़ रुपए का पूंजीगत निवेश करना है।
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