अगर अमेरिका के चार सबसे ताकतवर शहरों सैन फ्रांसिस्को, लॉस एंजिल्स, न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन डी.सी.मिलकर एक कंपनी बना लें, तो यह शायद दुनिया का सबसे प्रभावशाली “कॉनग्लोमरेट” होगा। यह विचार पहली बार 1996 में सोचा गया था, लेकिन बीते पंद्रह सालों, खासकर पिछले तीन सालों ने इसे और भी स्पष्ट बना दिया है।
कैसा दिखेगा ऑर्गनाइजेशन चार्ट?
अगर अमेरिका के चार बड़े शहर एक काल्पनिक कंपनी की तरह काम करें तो उसका ऑर्गनाइजेशन चार्ट कुछ ऐसा दिखेगा- StoryCo (लॉस एंजिल्स/हॉलीवुड) कहानियां, फिल्में, सेलेब्रिटी और कल्चर बनाता है, ComputeCo (सैन फ्रांसिस्को/सिलिकॉन वैली) टेक्नोलॉजी यानी मोबाइल, ऐप्स, एआई, चिप्स और क्लाउड तैयार करता है। MoneyCo (न्यूयॉर्क/वॉल स्ट्रीट) टेक और मीडिया को फाइनेंस कर फंडिंग, स्टॉक्स और डील्स मैनेज करता है, जबकि ConsentCo (वॉशिंगटन डी.सी.) नियम बनाकर, विवाद सुलझाकर और परमिशन तय करके पूरी व्यवस्था को कंट्रोल करता है। यह भले काल्पनिक हो, लेकिन इन चारों का असली कोऑर्डिनेशन ही अमेरिका की ताकत को परिभाषित करता है।
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कैसे काम करता है लूप?
अमेरिका की यह चार शहर कंपनी एक साझा लूप पर चलती है। वही क्लाउड प्लेटफ़ॉर्म जो फिल्मों को स्ट्रीम करता है, वही बैंकिंग और सिटी सर्विसेज को भी संभालता है। वही डेटा जो आपको मूवी रिकमेंड करता है, वही विज्ञापनों और राजनीति की रणनीति तय करता है। यहां तक कि लोग भी—कभी फिल्मों में, कभी टेक में, कभी फाइनेंस और कभी गवर्नमेंट में—करियर बदलते हुए इसी इकोसिस्टम में घूमते रहते हैं।
लेकिन इसका सबसे बड़ा असर शेयर्ड रिस्क में दिखता है। जब वही कंपनियां सब कुछ कंट्रोल करती हैं, तो एक गलती पूरी व्यवस्था को हिला सकती है। यह किसी गुप्त साज़िश से नहीं, बल्कि इंसेंटिव्स की समानता से पैदा हुआ सिस्टम है—जहां हर सेक्टर का फायदा आपस में जुड़ा है और नुकसान भी।
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