इस प्रस्तुति में लगभग 14,000 आदिवासी बच्चों के अलावा पं. हरिप्रसाद चौरसिया, राकेश चौरसिया, अमान व अयान अली बंगश, राहुल शर्मा, जयंती कुमारेश, शेख व कलीशबी महबूब, गिरिधर उडुपा का विशेष योगदान रहा।

कोलकाता स्थित सांस्कृतिक कार्यकर्ता संदीप भुटोरिया और तीन ग्रैमी पुरस्कार विजेता रिकी केज।
Credit: Image – Prabha Khaithan foundation