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इलिनॉय से कांग्रेस की दौड़ में भारतीय मूल के नील खोत, महंगाई और इमिग्रेशन चुनावी हथियार

नील खोत डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से चुनाव मैदान में हैं। यह सीट वर्तमान सांसद राजा कृष्णमूर्ति के खाली करने के बाद खाली हो रही है।

 नील खोत नील खोत / X/@NeilForCongress

अमेरिका के इलिनॉय राज्य के 8वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से भारतीय मूल के उद्यमी नील खोत अमेरिकी संसद (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) का चुनाव लड़ रहे हैं। उनकी चुनावी मुहिम में महंगाई, इमिग्रेशन, नौकरी छूटने का डर और सोशल सिक्योरिटी व मेडिकेयर में कटौती की आशंका सबसे बड़े मुद्दे बनकर उभरे हैं।

नील खोत डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से चुनाव मैदान में हैं। यह सीट वर्तमान सांसद राजा कृष्णमूर्ति के खाली करने के बाद खाली हो रही है, जो अब अमेरिकी सीनेट का चुनाव लड़ रहे हैं।

नील खोत ने कहा कि जब वह मतदाताओं से मिलते हैं, तो सबसे ज्यादा चिंता बढ़ती महंगाई को लेकर सामने आती है। उन्होंने बताया कि बीमा प्रीमियम बढ़ रहे हैं, ब्याज दरें बहुत ज्यादा हैं, लोग घर खरीदने में असमर्थ हैं और रोजमर्रा की चीजें और किराना महंगा हो गया है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों में भी असमंजस है, क्योंकि टैरिफ और व्यापार नीति को लेकर कोई स्पष्ट दिशा नहीं है, जिससे उन्हें फैसले लेने में दिक्कत हो रही है।

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इमिग्रेशन कार्रवाई से डर का माहौल
नील खोत ने बताया कि इमिग्रेशन रेड्स और कार्रवाई को लेकर लोगों में डर का माहौल है। उन्होंने कहा कि कई कारोबारी और प्रवासी परिवार आशंकित हैं कि कहीं उन्हें जबरन उठाकर हिरासत में न ले लिया जाए। पहली पीढ़ी के प्रवासी होने के नाते यह मुद्दा उनके लिए व्यक्तिगत भी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को स्वागत करने वाला देश होना चाहिए, न कि डर पैदा करने वाला।

बुजुर्गों की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता
खोत ने कहा कि वह मेडिकेयर और सोशल सिक्योरिटी में किसी भी तरह की कटौती का विरोध करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि SNAP जैसे सहायता कार्यक्रम, हेल्थकेयर सुविधाएं और बुजुर्गों और जरूरतमंदों के लिए सुरक्षित रहनी चाहिए। उनका कहना है कि दुनिया के सबसे अमीर देश में इलाज के खर्च से लोगों को दिवालिया नहीं होना चाहिए।

खुद को बताते हैं ग्राउंड से जुड़ा उम्मीदवार
नील खोत ने कहा कि वह कोई करियर पॉलिटिशियन नहीं, बल्कि एक छोटे कारोबारी और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उनका कहना है कि वहप्रवासियों के अधिकारों, मेहनतकश परिवारों और व्यापारियों के लिए बेहतर माहौल बनाने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं।

ग्रासरूट कैंपेन और चुनावी तैयारी
नील खोत ने बताया कि उनका चुनाव अभियान पूरी तरह ग्रासरूट स्तर पर आधारित है। डेमोक्रेटिक प्राइमरी 17 मार्च को होगी और उनका नाम पहले ही मतपत्र में शामिल हो चुका है। उन्होंने बताया कि इलाका लगभग 7.5 लाख आबादी वाला है, जिसमें

भारत-अमेरिका संबंधों पर भी राय
विदेश नीति पर बोलते हुए नील खोत ने कहा कि अमेरिका को डराने की बजाय दोस्ती और सहयोग का रास्ता अपनाना चाहिए। भारत-अमेरिका संबंधों पर उन्होंने कहा कि दुनिया का सबसे पुराना और सबसे बड़ा लोकतंत्र एक-दूसरे के और करीब आने चाहिए।

पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका में भारतीय-अमेरिकियों की राजनीतिक भागीदारी तेजी से बढ़ी है। कांग्रेस, राज्य विधानसभाओं और स्थानीय सरकारों में उनकी मौजूदगी लगातार मजबूत हो रही है।

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