सांकेतिक / AI
जब अमेरिका ने अपना 250वां स्वतंत्रता दिवस मनाया, तो भारतीय-अमेरिकियों ने सोशल मीडिया पर उन आप्रवासी यात्राओं को याद किया जो उनके परिवारों को इस देश में ले आईं और उन मौकों के बारे में बताया जिन्होंने उनकी जिंदगी को आकार दिया।
स्कॉलरशिप और उच्च शिक्षा से लेकर एंटरप्रेन्योरशिप और टेक्नोलॉजी करियर तक, उनकी कहानियों के रास्ते अलग-अलग थे, लेकिन उनमें एक बात समान थी: शिक्षा, कड़ी मेहनत और मौकों के जरिए अमेरिका में नई जिंदगी बनाना।
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वेंचर कैपिटल फर्म 'एनियाक वेंचर्स' (Eniac Ventures) के को-फाउंडर और जनरल पार्टनर निहाल मेहता के लिए यह कहानी 1968 में शुरू हुई, जब उनके पिता विस्कॉन्सिन पहुंचे। वे अपने एक अंकल से उधार लिए 1,000 डॉलर और मार्क्वेट यूनिवर्सिटी में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में मास्टर्स डिग्री करने के लिए मिली स्कॉलरशिप के साथ वहां आए थे। मेहता ने 'X' पर यह जानकारी दी।
उनके माता-पिता की शादी 1972 में तयशुदा तरीके से (अरेंज्ड मैरिज) हुई थी, जिसके बाद उनकी मां विस्कॉन्सिन चली गईं। एक ऐसी जगह जहां वे दोनों पहले कभी नहीं गए थे। बाद में परिवार आयोवा में बस गया, जहां उनके पिता ने 'जॉन डीयर' (John Deere) कंपनी में काम किया और वहीं मेहता का जन्म हुआ।
पहले के इंटरव्यू में मेहता ने बताया है कि उनके माता-पिता 1970 के दशक की शुरुआत में भारत से आकर यहां बसे थे। उन्होंने अपने माता-पिता द्वारा नौकरी के साथ-साथ चलाए जाने वाले छोटे से बिजनेस को अपनी एंटरप्रेन्योरशिप यात्रा की प्रेरणा माना है; इसी यात्रा की वजह से उन्होंने 2009 में 'एनियाक वेंचर्स' की सह-स्थापना की। मेहता की शादी रेशमा सौजानी से हुई है, जो 'गर्ल्स हू कोड' (Girls Who Code) और 'मॉम्स फर्स्ट' (Moms First) की फाउंडर हैं।
In 1968, my dad landed in Wisconsin with $1,000 borrowed from his uncle and a full scholarship to Marquette University for his Masters in Mechanical Engineering.
— nihal (@nihalmehta) July 4, 2026
That was the whole plan. Borrow the money. Show up. Figure it out.
In 1972, he had an arranged marriage to my mom,… pic.twitter.com/GlhEAPZzKY
फिनटेक कंपनी 'स्टिल्ट' (Stilt) के को-फाउंडर और पूर्व चीफ एग्जीक्यूटिव रोहित मित्तल ने दूसरे देशों से आकर बसने वालों (इमिग्रेंट्स) के अनुभव का एक अलग पहलू साझा किया। मित्तल ने लिखा कि वे कोलंबिया यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल स्टूडेंट के तौर पर अमेरिका आए थे और अपना पहला साल एक दोस्त के सोफे पर सोकर बिताया, क्योंकि अपार्टमेंट किराए पर लेने के लिए जरूरी क्रेडिट हिस्ट्री उनके पास नहीं थी।
इसी अनुभव ने उन्हें 2015 में कोलंबिया यूनिवर्सिटी के ही ग्रेजुएट प्रियंक सिंह के साथ मिलकर 'स्टिल्ट' शुरू करने के लिए प्रेरित किया। यह कंपनी दूसरे देशों से आकर बसने वालों के लिए लोन और फाइनेंशियल सर्विसेज तक पहुंच बढ़ाने पर केंद्रित थी और 2022 में JG वेंटवर्थ (JG Wentworth) ने इसे खरीद लिया।
Happy July 4th.
— Rohit Mittal (@rohitdotmittal) July 4, 2026
This day is a reminder of what America truly is: a living idea that says where you start doesn’t have to determine where you finish. Opportunity, earned through effort, still opens doors here like nowhere else.
I came as an international student from India to… pic.twitter.com/zyH9BtjwZK
सिद्धार्थ पाई के लिए, यह सफर उन कई भारतीय छात्रों के अनुभव जैसा था जो टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपना करियर शुरू करने से पहले अमेरिका में हायर एजुकेशन लेते हैं। पाई ने लिखा कि उन्होंने अमेरिका में साढ़े चार साल बिताए। यहां उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ कनेक्टिकट से मास्टर्स डिग्री हासिल की और फिर जेपी मॉर्गन चेज और वॉलमार्ट में काम किया।
पाई ने लिखा कि अमेरिका की इनोवेशन, एंटरप्रेन्योरशिप, एकेडमिक एक्सीलेंस और मौकों की भावना दुनिया को प्रेरित करती रहती है।
Happy 250th Independence Day to all my friends across the United States!
— Siddarth Pai (@siddarthpaim) July 4, 2026
I feel incredibly fortunate to have spent 4.5 wonderful years in America. I had the privilege of earning my Master’s degree from the University of Connecticut, beginning my career at JPMorgan Chase, and… pic.twitter.com/k7JVpjE16h
भले ही इनकी कहानियां अलग-अलग पीढ़ियों और करियर से जुड़ी हों, लेकिन सभी ने यूनिवर्सिटी, एम्प्लॉयर और स्टार्टअप इकोसिस्टम जैसे संस्थानों को मौकों का जरिया बताया। मेहता ने 'अमेरिकन ड्रीम' को अपने जैसे प्रवासी परिवारों के लिए अब भी ऑपरेटिंग सिस्टम जैसा बताया, वहीं मित्तल ने लिखा कि देश का हमेशा से कायम रहने वाला वादा इस भरोसे में है कि आपकी शुरुआत कहां से होती है, यह जरूरी नहीं कि वही तय करे कि आप कहां पहुंचेंगे।
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