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संत प्रेमानंद पुरी का आह्वान: पूरी दुनिया योग अपनाए, युद्ध की नौबत ही नहीं आएगी

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर एडिटोरियल कंसल्टेंट अमित देशमुख ने उज्जैन के प्रसिद्ध संत एवं योग साधक स्वामी प्रेमानंद पुरी जी से विशेष बातचीत की। इस दौरान स्वामी जी ने योग के आध्यात्मिक, मानसिक और शारीरिक महत्व पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए।

 उज्जैन के प्रसिद्ध संत एवं योग साधक स्वामी प्रेमानंद पुरी उज्जैन के प्रसिद्ध संत एवं योग साधक स्वामी प्रेमानंद पुरी / Amit Deshmukh

उज्जैन के प्रसिद्ध संत एवं योग साधक स्वामी प्रेमानंद पुरी का कहना है कि यदि योग के रूप में दुनिया के तमाम देश भारत की इस प्राचीन परंपरा को अपनाएंगे तो युद्ध की नौबत ही नहीं आएगी क्योंकि योग चित्त को शांत रखकर शांति और सद्भाव का संदेश देता है। कभी युद्ध ही नहीं होगा। योग का मतलब ही जोड़ना है। बेशक, जहां जोड़ने की बात हो, वहां तोड़ने की बात हो ही नहीं सकती।

प्रेमानंदजी ने कहा कि मैं आपके चैनल के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र से एक अपील भी करना चाहता हूं कि हर देश में भारतीय साधु जो योग को प्रतिपादित कर रहे हैं उनको आप अपना दूत बनाइये। यानी युनाइटेड नेशन के योग अंबेसेडर। जब दूत के रूप में ये प्रतिनिधि दुनिया के देशों में जाएंदे और योग क्रियाएं कराएंगे तो लोगों में मानसिक संतुलन बढ़ेगा। जब मानसिक संतुलन बढ़ेगा तो उससे हिंसक विकृतियों का अंत होगा। 

पुरीजी ने कहा कि मैं संयुक्त राष्ट्र के महासचिव से अपील करना चाहता हूं कि आप हर देश के लिए योग का ब्रांड अंबेसेडर बनाएं। आप जिस देश के लिए जितना समय देने के लिए कहेंगे मैं स्वयं इसके लिए तैयार हूं। आज की दुनिया में योग के इस शांति संदेश की बहुत जरूरत है।   

यह भी पढ़ें: ह्यूस्टन में भारतीय दूतावास करेगा योग दिवस का आयोजन, सभी आमंत्रित

बकौल प्रेमानंद पुरी भारत पूरी दुनिया को 'वसुधैव कुटुम्बकम' का संदेश देता है। इसका अर्थ है पूरी दुनिया एक है। और योग का संदेश भी यही है क्योंकि योग लोगों को, दुनिया को आपस में जोड़ने की बात कहता है। 

पूरी दुनिया में रह रहे भारतीयों के लिए भी संते प्रेमानंद जी का संदेश है। वे कहते हैं कि पूरी दुनिया में रहने वाले भारतीयों से मैं एक ही बात कहूंगा कि आप अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) को योग करें। हर भारतीय की कर्तव्य है कि वह योग करे, यानी समस्त लोगों को आपस में जोड़े। कोई एक समय तय करें, कोई एक स्थान तय करें। कोई एक क्रिया तय करें या यहां तक कि कोई एक व्यंजन चुन लें और अपनी धरती से दूर रहते हुए भी अपनाई हुई धरती के माध्यम से आपस में जुड़ें। अपनी संस्कृति से जुड़े। यह बच्चों के लिए भी उत्तम रहेगा क्योंकि इसके माध्यम से वे भारतीय संस्कृति से जुड़ेंगे। इस परस्पर जुड़ाव से भारतीय संस्कृति का विकास तो होगा ही, उस देश का भी विकास होगा जहां वे रह रहे हैं। 

स्वामी प्रेमानंद पुरी जी ने कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आत्मिक जागरण और जीवन में संतुलन स्थापित करने का एक श्रेष्ठ मार्ग है। योग व्यक्ति को स्वयं से जोड़ता है और उसे सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि आज विश्व के अनेक देशों में योग को अपनाया जा रहा है, जो भारत की प्राचीन ऋषि परंपरा और ज्ञान का वैश्विक सम्मान है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस ने योग को एक जन-आंदोलन का स्वरूप प्रदान किया है।

स्वामी जी ने युवाओं से प्रतिदिन योग और ध्यान करने का आग्रह करते हुए कहा कि आधुनिक जीवन की चुनौतियों, तनाव और मानसिक अशांति से मुक्ति पाने के लिए योग सबसे प्रभावी साधन है। योग से व्यक्ति का शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है, मन शांत रहता है और जीवन में अनुशासन विकसित होता है।

उन्होंने यह भी कहा कि योग मानवता को शांति, सद्भाव और स्वस्थ जीवन का संदेश देता है। योग का अभ्यास केवल एक दिन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।

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