सौरभ नेत्रवलकर / Willow by Cricbuzz
भारतीय मूल के अमेरिकी क्रिकेटर सौरभ नेत्रवलकर की जिंदगी पर बनी डॉक्यूमेंट्री 'द लॉन्ग गेम: सौरभ नेत्रवलकर, बिटवीन टू वर्ल्ड्स' 17 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है।
टीम यूएसए के क्रिकेटर और सिलिकॉन वैली में इंजीनियर के तौर पर काम करने वाले सौरभ नेत्रवलकर का कहना है कि यह फिल्म सिर्फ उनकी क्रिकेट उपलब्धियों की कहानी नहीं है बल्कि संघर्ष, खुद को नए सिरे से स्थापित करने और दो अलग-अलग दुनियाओं के बीच अपनी पहचान बनाने की कहानी है।
न्यू इंडिया अब्रॉड को दिए एक विशेष इंटरव्यू में सौरभ ने बताया कि उन्होंने अपनी जिंदगी पर डॉक्यूमेंट्री बनाने के लिए क्यों हामी भरी, भारत और अमेरिका दोनों से उनका रिश्ता कैसा है, इंजीनियरिंग और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को एक साथ कैसे संभालते हैं और अमेरिका में क्रिकेट के भविष्य को लेकर उनकी क्या उम्मीदें हैं।
डॉक्यूमेंट्री बनाने का फैसला क्यों लिया?
सौरभ ने बताया कि 2024 टी20 विश्व कप में टीम यूएसए के शानदार प्रदर्शन के बाद जब विलो ने उनसे डॉक्यूमेंट्री बनाने का प्रस्ताव रखा, तो शुरुआत में उन्हें यह विचार थोड़ा नया लगा। लेकिन जब उनकी मुलाकात ऑस्कर विजेता निर्माता एडम लाइपजिग और पूरी फिल्म टीम से हुई तो उनका नजरिया बदल गया।
उन्होंने कहा कि मुझे सबसे अच्छी बात यह लगी कि वे सिर्फ क्रिकेटर के रूप में नहीं, बल्कि एक इंसान के रूप में मुझे समझना चाहते थे।
सौरभ का मानना है कि यह डॉक्यूमेंट्री क्रिकेट से कहीं बढ़कर है। उन्होंने कहा कि इसमें असफलताओं, अनिश्चितताओं, आत्म-विकास और जिंदगी में नए रास्ते खोजने की कहानी दिखाई गई है।
उन्होंने कहा कि अगर लोग मेरी कहानी में अपनी जिंदगी का कोई हिस्सा देख सकें और उससे कुछ सकारात्मक सीख सकें, तो अपनी कहानी साझा करना सार्थक है।
दो देशों के बीच नहीं, एक ही जिंदगी के दो हिस्से
डॉक्यूमेंट्री का नाम 'बिटवीन टू वर्ल्ड्स' है, लेकिन सौरभ इसे दो अलग-अलग पहचान की कहानी नहीं मानते। उन्होंने भारत को अपनी 'जन्मभूमि' और अमेरिका को अपनी 'कर्मभूमि' बताया। उनके अनुसार भारत ने उन्हें परिवार, संस्कार और क्रिकेट के प्रति जुनून दिया, जबकि अमेरिका वह जगह बना जहां उन्होंने अपना पेशेवर करियर बनाया, परिवार बसाया और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दोबारा पहचान बनाई।
उन्होंने कहा कि बाहर से देखने पर यह दो अलग-अलग दुनिया लग सकती हैं, लेकिन मेरे लिए दोनों एक-दूसरे की पूरक हैं। ये मेरी एक ही जिंदगी के दो अलग-अलग हिस्से हैं।
इंजीनियरिंग और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कैसे बनाया संतुलन?
सौरभ ने कहा कि इंजीनियरिंग की नौकरी और टीम यूएसए के लिए क्रिकेट खेलना आसान नहीं है। उनके अनुसार, इसका सबसे बड़ा मंत्र है कि हर समय यह तय करना कि किस काम को प्राथमिकता देनी है। उन्होंने अपने मैनेजर, कोच, टीम के साथियों और परिवार का धन्यवाद किया।
खासतौर पर उन्होंने अपनी पत्नी का ज़िक्र करते हुए कहा कि दोनों करियर को साथ लेकर चलने में उनकी सबसे बड़ी भूमिका रही है। सौरभ का मानना है कि दोनों पेशे एक-दूसरे की मदद करते हैं।
उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग मुझे बौद्धिक रूप से चुनौती देती है, जबकि क्रिकेट शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाता है। काम में इस्तेमाल होने वाली विश्लेषण करने की क्षमता क्रिकेट में मदद करती है, वहीं क्रिकेट से मिलने वाला टीमवर्क और धैर्य मेरे पेशेवर जीवन में काम आता है।
अमेरिका में क्रिकेट तेजी से बदल रहा है
सौरभ ने कहा कि जब वह पहली बार अमेरिका आए थे, तब क्रिकेट केवल समुदाय तक सीमित एक सप्ताहांत का खेल था। लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने बताया कि मेजर लीग क्रिकेट (MLC) की शुरुआत, पेशेवर खिलाड़ियों के लिए अनुबंध, बेहतर कोचिंग व्यवस्था और बढ़ती मीडिया कवरेज ने क्रिकेट को नई दिशा दी है।
साथ ही 2024 टी20 विश्व कप में टीम यूएसए के प्रदर्शन ने पहली बार कई अमेरिकियों का ध्यान क्रिकेट की ओर खींचा। उन्होंने कहा कि अभी भी काफी सफर बाकी है, लेकिन बदलाव की रफ्तार साफ दिखाई दे रही है। आज नई पीढ़ी के खिलाड़ियों के पास कहीं ज्यादा अवसर हैं, जितने मेरे अमेरिका आने के समय नहीं थे।
डॉक्यूमेंट्री से क्या संदेश देना चाहते हैं?
सौरभ चाहते हैं कि यह फिल्म सिर्फ क्रिकेट प्रेमियों तक सीमित न रहे। खासतौर पर प्रवासी भारतीयों और पहली पीढ़ी के भारतीय-अमेरिकियों को इससे प्रेरणा मिले। उन्होंने कहा कि यह डॉक्यूमेंट्री वास्तव में क्रिकेट के बारे में नहीं है। यह संघर्ष, खुद को पहचानने और मुश्किल समय में भी लगातार आगे बढ़ते रहने की कहानी है। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि युवा यह समझें कि उन्हें अपनी किसी एक पहचान को छोड़कर दूसरी पहचान अपनाने की जरूरत नहीं है।
आगे की क्या योजना है?
सौरभ ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता टीम यूएसए को लगातार बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए क्वालिफाई कराना और विश्व क्रिकेट में अमेरिका की स्थिति को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक में क्रिकेट की वापसी इस खेल के लिए एक बड़ा अवसर होगी।
व्यक्तिगत जीवन में वह लगातार बेहतर खिलाड़ी, बेहतर इंजीनियर, बेहतर पति और बेहतर पिता बनने की कोशिश जारी रखना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि मैं टीम यूएसए के लिए योगदान देता रहना चाहता हूं, फिट रहना चाहता हूं, अपने खेल में लगातार सुधार करना चाहता हूं और नई पीढ़ी के खिलाड़ियों की मदद करना चाहता हूं। साथ ही एक बेहतर पति, पिता, इंजीनियर और जीवनभर सीखने वाला इंसान भी बनना चाहता हूं।
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