फिल्म का अंत होगा। आपका भी मुंह वैसा ही खुला होगा जैसे फिल्म के पहले दृश्य में मरीज का दिखाया गया था। और इसी के साथ आप इस फिल्म के राइटर- डायरेक्टर, वेंकटेश महा को धन्यवाद कहेंगे।
कुछ पत्रिकाओं में छपने के अलावा लिखने के क्रम में चार किंडल बुक्स प्रकासित की है। खट्टी-मीठी नाम से ब्लॉग लिखा करती हूँ जो अब नियमित नहीं है। इधर कुछ वर्षों से फ़ेसबुक की दुनिया ज़्यादा वृहत हुई। टेक्नोलॉजी और भाषा के मेल से हिन्दी को इसने और विस्तार दिया है।