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भारत-अमेरिका रणनीति पर अब किसका होगा असर? भारतीय मूल के समीर लालवानी को मिली बड़ी वैश्विक जिम्मेदारी

भारतीय मूल के विद्वान समीर लालवानी ने कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के दक्षिण एशिया कार्यक्रम में सीनियर फेलो के रूप में पदभार संभाला है।

 समीर लालवानी समीर लालवानी / Stimson Centre

भारतीय मूल के रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ समीर लालवानी को अमेरिका के प्रतिष्ठित थिंक टैंक कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस में बड़ी जिम्मेदारी मिली है। भारतीय मूल के विद्वान समीर लालवानी ने कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के दक्षिण एशिया कार्यक्रम में सीनियर फेलो के रूप में पदभार संभाला है।

इसकी जानकारी कार्नेगी के दक्षिण एशिया कार्यक्रम के निदेशक मिलन वैष्णव ने एक्स पर साझा की है। मिलन वैष्णव के अनुसार समीर लालवानी अब अमेरिका-भारत संबंधों, सैन्य एवं प्रौद्योगिकी प्रतिस्पर्धा और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा से जुड़े शोध और नीतिगत कार्यों का नेतृत्व करेंगे।

कार्नेगी एंडोमेंट की वेबसाइट के अनुसार समीर लालवानी मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी MIT के सिक्योरिटी स्टडीज प्रोग्राम से रिसर्च एफिलिएट भी हैं। इसके अलावा वह रणनीतिक मामलों की प्रसिद्ध वेबसाइट 'वॉर ऑन द रॉक्स' में कॉन्ट्रिब्यूटिंग एडिटर के रूप में भी जुड़े हुए हैं।

उनका शोध मुख्य रूप से सैन्य प्रौद्योगिकी प्रतिस्पर्धा, प्रतिरोध (डिटरेंस), गठबंधन की राजनीति और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा जैसे विषयों पर केंद्रित है। उनके शोध पत्र इंटरनेशनल स्टडीज क्वार्टरली, सिक्योरिटी स्टडीज, जर्नल ऑफ स्ट्रैटेजिक स्टडीज और सर्वाइवल जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।

वहीं उनके नीति संबंधी लेख फॉरेन अफेयर्स और वॉर ऑन द रॉक्स जैसे प्रमुख मंचों पर प्रकाशित हुए हैं। साल 2022 से 2025 तक समीर लालवानी यूनाइटेड स्टेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ पीस (USIP) में सीनियर एक्सपर्ट रहे। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी रक्षा विभाग (यूएस डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस) द्वारा प्रायोजित चीन-भारत युद्धक्षेत्र (बैटलस्पेस) से जुड़े शोध कार्यों का नेतृत्व किया।

उन्होंने भारत-अमेरिका रक्षा प्रौद्योगिकी सहयोग, विशेष रूप से इंडिया-यूएस डिफेंस एक्सेलेरेशन इकोसिस्टम (INDUS-X) को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्नेगी के अनुसार समीर लालवानी अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (यूएस हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) और यूएस-चीन आर्थिक एवं सुरक्षा समीक्षा आयोग के सामने विशेषज्ञ के रूप में गवाही भी दे चुके हैं।

इसके अलावा वह समय-समय पर अमेरिकी सरकार को रणनीतिक मामलों पर जानकारी और परामर्श भी देते रहे हैं। अपने करियर के शुरुआती दौर में समीर लालवानी स्टिम्सन सेंटर के दक्षिण एशिया कार्यक्रम के निदेशक भी रह चुके हैं।

वह काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के टर्म मेंबर और रैंड कॉर्पोरेशन में स्टैंटन न्यूक्लियर सिक्योरिटी पोस्टडॉक्टोरल फेलो भी रहे हैं। अपनी डॉक्टरेट की पढ़ाई के दौरान उन्होंने भारत और पाकिस्तान में फील्ड रिसर्च तथा ब्रिटेन में ऐतिहासिक अभिलेखों पर शोध किया।

वह भारत के इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज़ एंड एनालिसिस (IDSA) में विजिटिंग फेलो के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। समीर लालवानी वर्तमान में जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय के वॉल्श स्कूल ऑफ फॉरेन सर्विस के सिक्योरिटी स्टडीज़ प्रोग्राम में एडजंक्ट प्रोफेसर हैं।

इससे पहले वह जॉर्ज वॉशिंगटन विश्वविद्यालय और एमआईटी में भी अध्यापन कर चुके हैं। शिक्षा की बात करें तो उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले से राजनीति विज्ञान (पॉलिटिकल साइंस) में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से राजनीति विज्ञान में डॉक्टरेट (पीएचडी) की उपाधि हासिल की।

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