इंदिरा नूयी / Image source: Britannica
भारतीय-अमेरिकी बिजनेस एग्जीक्यूटिव और पेप्सिको की पूर्व चेयरपर्सन और CEO इंदिरा नूयी ने कहा कि वह भारत में किसी बड़ी कंपनी की CEO कभी नहीं बन पातीं। अमेरिका की पूर्व सेक्रेटरी ऑफ स्टेट कोंडोलीजा राइस के साथ बातचीत में उन्होंने कॉर्पोरेट लीडरशिप के शिखर तक पहुंचने का श्रेय अमेरिका के मेरिट-बेस्ड (योग्यता-आधारित) सिस्टम को दिया।
इस बातचीत में उन्होंने भारत के लोकतंत्र, चीन के सेंट्रलाइज्ड गवर्नेंस मॉडल और विकास के उनके अलग-अलग रास्तों पर भी चर्चा की। अपने करियर को याद करते हुए नूयी ने कहा कि अमेरिका ने उन्हें ऐसे मौके दिए जो शायद उन्हें कहीं और नहीं मिलते।
नूयी ने कहा कि यहां कोई अप्रवासी बिना कुछ लिए आ सकता है और अमेरिका की एक मशहूर कंपनी (जिसे 'रेड, व्हाइट और ब्लू' कंपनी कहा जाता है) का CEO बन सकता है। दुनिया के किसी और देश में ऐसा नहीं हो सकता।
बकौल नूयी- मैं दुनिया के किसी भी दूसरे देश में, जिसमें भारत भी शामिल है, कभी CEO नहीं बन पाती। उन्होंने इस कामयाबी का श्रेय अमेरिका के मेरिट-बेस्ड सिस्टम को दिया। उन्होंने कहा कि- ऐसा इसलिए है क्योंकि सिस्टम मेरिट-बेस्ड है। मेंटर्स को इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि आप पुरुष हैं या महिला, या आपकी एथनिकिटी या जेंडर क्या है; उन्हें बस इससे मतलब होता है कि सबसे काबिल लोग टॉप पर पहुंचें।
"I could never have become CEO in any other country in the world, including in India..It's because the system here in America is a meritocratic system," says ex-Pepsi CEO Indira Nooyi pic.twitter.com/nOVN71lMry
— Shashank Mattoo (@MattooShashank) July 2, 2026
चेन्नई से लेकर अमेरिका की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक का नेतृत्व करने तक के अपने सफर के आधार पर, नूयी ने भारत, चीन और अमेरिका के बीच के अंतर पर बात की। उन्होंने भारत के लोकतंत्र को जटिल और धीमी गति वाला बताया, जबकि अमेरिका की 'मेरिट-बेस्ड' (योग्यता-आधारित) प्रणाली की तारीफ की।
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भारत और चीन की तुलना करते हुए, नूयी ने कहा कि दोनों देश वहां रहने वालों और आने वालों के लिए बहुत अलग अनुभव देते हैं। उन्होंने चीन को काफी हद तक एक जैसा और व्यवस्थित बताया, जबकि भारत को बहुत अधित अनिश्चित कहा।
नूयी ने कहा कि भारत एक अव्यवस्थित देश है। भारत की खूबसूरती इसी अव्यवस्था में है। पूरी तरह से अव्यवस्था। उन्होंने कहा कि भारत की अव्यवस्था उसकी पहचान का एक अहम हिस्सा है और जो लोग वहां समय बिताते हैं, उन्हें इसकी आदत हो जाती है।
वे कहती हैं कि अगर आप भारत से परिचित हैं, और आपने पहले भारत की यात्रा की है, और आपको अपने आस-पास की वह अव्यवस्था पसंद है, तो आप वापस जाते हैं। यह किसी नशे की तरह है। आपको इसकी लत लग जाती है। साथ ही, उन्होंने माना कि यह देश शायद हर किसी को पसंद न आए।
नूयी ने कहा कि अगर आपको साफ-सुथरी, व्यवस्थित जिंदगी पसंद है, तो भारत आपके लिए बहुत मुश्किल हो सकता है। नूयी ने कहा कि भारत का लोकतांत्रिक ढांचा उसके विकास की गति में योगदान देता है क्योंकि फैसले लेने की प्रक्रिया में आम जनता की बड़ी भागीदारी होती है।
उन्होंने कहा कि जब हर किसी के पास वोट होता है और हर किसी की बात सुनी जाती है, तो तरक्की धीमी होती है। लेकिन मुझे खुशी है कि ऐसा ही है। उन्होंने इसकी तुलना चीन के सेंट्रलाइज्ड सिस्टम से की और कहा कि देश की आर्थिक तरक्की में इसकी अहम भूमिका रही है।
नूयी कहती हैं कि मैं चीन को अंधेरे दौर से बाहर निकालने के लिए चीनी सिस्टम का सम्मान करती हूं। वह एक विश्व शक्ति इसलिए बना क्योंकि उन्होंने इसे सेंट्रलाइज्ड तरीके से किया। उन्होंने कहा कि भारत एक अलग मॉडल के तहत तरक्की कर रहा है। नूयी के अनुसार भारत अभी भी विश्व शक्ति बनने के लिए संघर्ष कर रहा है क्योंकि यहां लोकतंत्र है और तरक्की धीमी है। लेकिन मुझे खुशी है कि यह एक लोकतंत्र है।
कानूनी सिस्टम पर बात करते हुए, नूयी ने कहा कि भारत के कई शहरों में अदालतें हैं जो नागरिकों को न्याय पाने का जरिया देती हैं। उन्होंने कहा कि चीन में सरकार ही नियम बनाती है और फैसले लेती है।
नूयी ने अमेरिका में मौजूद मौकों के बारे में भी बात की और अपनी बेटियों से कहा कि वे खुशकिस्मत हैं कि उनका जन्म यहां हुआ। बकौल नूयी- मैं अपनी बेटियों से हमेशा यही कहती हूं। मैं उनसे कहती हूं, 'तुम्हें अंदाजा नहीं है कि तुम कितनी खुशकिस्मत हो कि दुनिया के सबसे महान देश में पैदा हुई हो,' और वे मेरी तरफ देखती हैं और कहती हैं, 'हमें बताओ कि यह सबसे महान कैसे है।
उन्होंने कहा कि तकनीकी इनोवेशन का सबसे ज्यादा असर तब होता है जब उसे सफलतापूर्वक कमर्शियलाइज किया जाता है। सिर्फ टेक्नोलॉजी विकसित करने से कोई फर्क नहीं पड़ता। असली बात तब होती है जब आप उसे कमर्शियलाइज करते हैं और दुनिया में कोई बदलाव लाते हैं।
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