मंगोलिया में बीती शाम यहां युद्ध कौशल और सैन्य रणनीतियों से अलग भारत की संस्कृति, रंगों और स्वाद के नाम रही। / मंगोलिया
मंगोलिया की राजधानी उलानबटार में इन दिनों बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास ‘खान क्वेस्ट 2026’ चल रहा है। बीती शाम यहां युद्ध कौशल और सैन्य रणनीतियों से अलग भारत की संस्कृति, रंगों और स्वाद के नाम रही।
भारतीय सेना ने एक भव्य 'इंडिया कल्चरल ईवनिंग' का आयोजन किया। इसके माध्यम से 18 देशों के सैनिकों को भारत की विविधता और परंपराओं से रूबरू कराया गया। यहां जैसे ही कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय दल के देशभक्ति गीत से हुई, पूरा माहौल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
भारतीय सैनिकों की सामूहिक प्रस्तुति ने न केवल देशभक्ति की भावना जगाई, बल्कि यह भी दिखाया कि भारतीय सेना अपनी सांस्कृतिक जड़ों से कितनी गहराई से जुड़ी हुई है। इसके बाद मंच पर भारत की पारंपरिक युद्ध कलाओं का शानदार प्रदर्शन हुआ। तेज गति, अनुशासन और कौशल से भरपूर इस प्रस्तुति ने विदेशी सैनिकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कई सैन्य अधिकारियों ने भारतीय योद्धा परंपराओं की समृद्ध विरासत की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रदर्शन भारत की ऐतिहासिक सैन्य संस्कृति की झलक प्रस्तुत करता है, लेकिन असली रंग तब जमा जब मंच पर पंजाब की धड़कन कहे जाने वाले भांगड़ा की प्रस्तुति शुरू हुई। ढोल की थाप और जोशीले संगीत ने माहौल को उत्सव में बदल दिया। भारतीय सैनिकों का उत्साह देखकर कई विदेशी सैनिक भी खुद को रोक नहीं पाए और भांगड़ा की धुन पर थिरकने लगे।
भाषा और सीमाओं की दीवारें मानो पल भर में गायब हो गईं और पूरा आयोजन एक वैश्विक परिवार की तरह नजर आया। हालांकि, शाम का सबसे स्वादिष्ट और चर्चित हिस्सा भारतीय व्यंजनों का था। भारतीय सेना ने विदेशी मेहमानों के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों के लोकप्रिय व्यंजनों की विशेष व्यवस्था की थी। जैसे ही गोलगप्पे परोसे गए, विदेशी सैनिकों की उत्सुकता बढ़ गई। किसी ने पहली बार गोलगप्पे का तीखा-खट्टा स्वाद चखा तो किसी ने बार-बार उनकी मांग की।
पापड़ी चाट, भेलपुरी, चूरमा, ठंडाई और आम पन्ना भी प्रतिभागियों के बीच खास आकर्षण का केंद्र रहे। कई विदेशी सैनिकों ने भारतीय भोजन को स्वाद और विविधता का अद्भुत मिश्रण बताया। भारतीय मेहमाननवाजी और आत्मीयता ने सभी का दिल जीत लिया।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न देशों के सैनिकों ने भारतीय दल के साथ बातचीत की, तस्वीरें खिंचवाईं और भारत के बारे में अपने अनुभव साझा किए। कई प्रतिभागियों ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन सैन्य अभ्यासों को केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रखते, बल्कि देशों के बीच दोस्ती और विश्वास को भी मजबूत बनाते हैं।
दरअसल, ‘खान क्वेस्ट 2026’ का उद्देश्य केवल संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों के लिए सैन्य सहयोग बढ़ाना नहीं है, बल्कि विभिन्न देशों की सेनाओं के बीच मानवीय संबंधों को भी सशक्त बनाना है। भारतीय सेना की यह सांस्कृतिक संध्या उसी सोच का जीवंत उदाहरण बनी। उलानबटार की इस शाम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारत अपनी सैन्य क्षमता के साथ ही अपनी संस्कृति, संगीत, नृत्य, भोजन और दिल जीत लेने वाली मेहमाननवाजी के लिए भी दुनिया भर में विशेष पहचान रखता है। भांगड़ा की थाप, गोलगप्पों का स्वाद और भारतीय सैनिकों की गर्मजोशी ने मंगोलिया में मौजूद विदेशी सैनिकों के दिलों पर ऐसी छाप छोड़ी, जिसे वे लंबे समय तक याद रखेंगे।
अन्य खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें न्यू इंडिया अब्रॉड
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
Comments
Start the conversation
Become a member of New India Abroad to start commenting.
Sign Up Now
Already have an account? Login