दो पूरी तरह से अलग-अलग संस्कृतियों के साथ तालमेल बिठाना जितना दिखता है उससे कहीं ज्यादा कठिन है। लेकिन नवरात्रि का सीजन वर्ष का वह समय है जब हम दो संस्कृतियों के संयोजन यानी एक भारतीय-अमेरिकी होने के अर्थ को पूरी तरह से अपना सकते हैं।

रूपनगुंटा परिवार का पारंपरिक गोलू उत्सव।
Credit: Ritu Marwah