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भारत की जलमग्न विरासत: प्राचीन द्वारका में चल रही खुदाई पर बनेगी डॉक्यूमेंट्री

वेब सीरीज में गुजरात के पवित्र तटीय शहर द्वारका के पानी में डूबे हुए हिस्से की खुदाई को दिखाया जाएगा। यह डॉक्यूमेंट्री सीरीज प्रमुख ग्लोबल OTT प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध होगी।

 सांकेतिक सांकेतिक / Ministry of Culture

एक नई डॉक्यूमेंट्री सीरीज और लिमिटेड वेब सीरीज में गुजरात के पवित्र तटीय शहर द्वारका के पानी में डूबे हुए हिस्से की खुदाई को दिखाया जाएगा। यह प्रस्तुति भारत के सबसे अहम अंडरवाटर आर्कियोलॉजिकल (पानी के नीचे पुरातत्व संबंधी) प्रोजेक्ट्स में से एक को दुनिया भर के दर्शकों के सामने लाएगी।

'एक्सकैवेशन्स एट द्वारका' (Excavations at Dwarka) नाम का यह प्रोजेक्ट, आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) और AEIOU फिल्म्स के बीच कई सालों के समझौते के तहत तैयार किया जा रहा है। यह सहयोग पहली बार हो रहा है जब पानी में डूबे शहर की खुदाई को एक खास लंबे समय तक चलने वाले सिनेमैटिक प्रोडक्शन के जरिए डॉक्यूमेंट किया जाएगा।

यह डॉक्यूमेंट्री वैज्ञानिक सबूतों और वेरिफाइड आर्कियोलॉजिकल खोजों के जरिए खुदाई को दिखाएगी, जिसमें पौराणिक कथाओं और अटकलों से बचा जाएगा। प्रोड्यूसर्स ने एक बयान में कहा कि प्रोडक्शन पानी के नीचे चल रही आर्कियोलॉजिकल जांच की प्रगति को दिखाएगा और साथ ही खोज के दौरान अपनाए गए तरीकों और मिली खोजों पर भी रोशनी डालेगा।

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इस समझौते के तहत, AEIOU फिल्म्स को कई सालों तक खुदाई को डॉक्यूमेंट करने के खास अधिकार मिले हैं। प्रोडक्शन हाउस ने कहा कि स्वतंत्र रूप से फंड किए गए इस प्रोजेक्ट का काम अभी रिसर्च पर बहुत जोर देने वाले चरण में है, जिसमें आर्काइवल स्टडीज, ऐतिहासिक पुष्टि और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल शामिल है। प्रोजेक्ट में मदद के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-असिस्टेड रिसर्च टूल्स का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, और सभी खोजों की एक्सपर्ट इंसानों द्वारा पुष्टि की जा रही है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशनोग्राफी, गोवा के पूर्व प्रिंसिपल टेक्निकल ऑफिसर और मरीन आर्कियोलॉजी एक्सपर्ट ए.एस. गौर ने कहा कि सरकारी संस्थानों और प्राइवेट फ़िल्ममेकर्स के बीच सहयोग से भारत की समुद्री विरासत को बचाने में मदद मिल सकती है, साथ ही रिसर्च, शिक्षा और जन जागरूकता को भी बढ़ावा मिल सकता है।

समुद्री विरासत प्रबंधन में भारत के पहले Ph.D. होल्डर विक्रांत पांड्या ने कहा कि यह डॉक्यूमेंट्री सबूतों पर आधारित रिसर्च और गहन स्कॉलरशिप के जरिए भारत के आर्कियोलॉजिकल इतिहास को पेश करने का मौका देती है।

पांड्या ने कहा कि द्वारका एक वर्ल्ड-क्लास डॉक्यूमेंट्री की हकदार है क्योंकि सभ्यताओं को उन कहानियों से याद किया जाता है जिन्हें वे संजोकर रखती हैं और दूसरों के साथ बांटती हैं। अब समय आ गया है कि भारत दुनिया को अपनी कहानी सुनाए, जो सबूतों और गहन स्कॉलरशिप पर आधारित हो।

AEIOU फिल्म्स के फाउंडर और एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर अंकुर सरैया ने इस साझेदारी को भारतीय डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकिंग के लिए एक मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रोडक्शन का मकसद देश की सबसे अहम अंडरवाटर आर्कियोलॉजिकल खोजों में से एक का एक पक्का विज़ुअल रिकॉर्ड बनाना है।

1930 के दशक से ही द्वारका अंडरवाटर आर्कियोलॉजिकल जांच का केंद्र रही है और इसे दुनिया की सबसे ज्यादा स्टडी की गई पानी में डूबी आर्कियोलॉजिकल साइट्स में से एक माना जाता है। इस डॉक्यूमेंट्री सीरीज का मकसद खुदाई की प्रक्रिया को फिल्म में सुरक्षित रखना और साथ ही भारत की पानी के नीचे मौजूद पुरातात्विक विरासत को दुनिया भर के दर्शकों के सामने पेश करना है।

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