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शांत हीरो और अकड़ने वाले अल्फा मेल से लेकर इमोशनली इंटेलिजेंट, कमजोर मर्दों तक... हिंदी सिनेमा आखिरकार सीख रहा है कि ताकत का मतलब दबदबा नहीं, बल्कि सहानुभूति है। इसलिए आइए बॉलीवुड की तारीफ करें कि उसने यह पक्का किया कि हर एनिमल के बाद एक सितारे जमीन पर या सैयारा जैसी फिल्म आए, ताकि मर्दानगी में थोड़ी समझदारी वापस लौट सके।

गली बॉय का पोस्टर...
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