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सपने और सच की अगर एक तस्वीर चिंताजनक है तो दूसरी आशाजनक और आश्वस्त करने वाली। और दोनों ही तस्वीरें एक तरह से शाश्वत हैं। क्योंकि इनसान सपने देखना तो छोड़ने वाला नहीं है। लिहाजा, संघर्ष और समृद्धि की कदमताल भी सनातन रहेगी।

प्रतीकात्मक तस्वीर।
Credit: Pew Research Centre