आयोजकों के अनुसार, सम्मेलन के सभी सत्र इस तरह तैयार किए गए हैं कि उनमें मंदिरों के पदाधिकारियों, युवा नेताओं, सामुदायिक कार्यकर्ताओं, पुजारियों, विद्वानों और श्रद्धालुओं के अनुभवों को जगह मिले।

इस साल के सम्मेलन में 9 पैनल में 65 वक्ता शामिल होंगे
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