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DFW के मंदिर और समुदायों ने मनाया अमेरिका250 जश्न, कर्मभूमि का आभार

यह सामूहिक प्रयास देश की आजादी, लोकतंत्र, विविधता और एकता की 250 साल पुरानी विरासत का सम्मान करने के लिए किया गया था।

 आयोजन की झलक।  आयोजन की झलक। / provided

डलास-फोर्ट वर्थ (DFW) मेट्रोप्लेक्स में 35 से ज्यादा हिंदू मंदिरों, सिख गुरुद्वारों और समुदाय संगठनों ने 4 जुलाई को अमेरिका की आजादी की 250वीं सालगिरह के मौके पर मिलकर जश्न मनाया।

इस इलाके में कई जगहों पर खास प्रार्थना सभाएं हुईं और यादगार बैनर लगाए गए। इस पहल को महेश चमारिया, सचिन सुगंधि और बालाजी अरियानन ने स्थानीय मंदिरों, गुरुद्वारों और कम्युनिटी ग्रुप्स के साथ मिलकर आयोजित किया।

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आयोजकों ने कहा कि यह जश्न हिंदू-अमेरिकियों की अमेरिका के प्रति अपनापन, आभार और देशभक्ति की भावना को दिखाता है। कई लोग इसे अपनी कर्मभूमि मानते हैं। एक ऐसी सोच जो उस जमीन के प्रति वफादारी और सेवा पर जोर देती है जहां कोई रहता और काम करता है। संजय पाधशाला और अर्पण प्रकाश जैसे स्थानीय उद्यमियों ने यादगार बैनरों की प्रिंटिंग की सेवा दी।

आध्यात्मिक मार्गदर्शन के अलावा, इस कार्यक्रम में शामिल DFW के मंदिर और गुरुद्वारे कम्युनिटी सेंटर के तौर पर भी काम करते हैं। यहां स्कूल चलाए जाते हैं, खाने-पीने की चीजें बांटने के कार्यक्रम होते हैं और स्थानीय चैरिटी को मदद दी जाती है।

यह खास जश्न ऐसे समय में मनाया जा रहा है जब भारतीय-अमेरिकी समुदाय नागरिक और आर्थिक गतिविधियों में अहम भूमिका निभा रहा है। अमेरिका की कुल आबादी का लगभग 1 प्रतिशत होने के बावजूद, भारतीय-अमेरिकी कुल फ़ेडरल टैक्स का अनुमानित 6 प्रतिशत हिस्सा देते हैं।

अमेरिका में इस समुदाय का इतिहास 1950 के दशक में आए अप्रवासियों की पहली लहर से शुरू होता है, जो मुख्य रूप से प्रोफेसर, डॉक्टर और इंजीनियर के तौर पर आए थे। तब से, बाद की पीढ़ियों ने बिजनेस लीडर, वैज्ञानिक, होटल उद्यमी, वकील और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल के तौर पर अपनी पहचान बनाई है।

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