अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर। / X/@USTradeRep
अमेरिका के 20वें व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर इस हफ्ते वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और दूसरे वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों से बातचीत के लिए भारत आएंगे। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि वह ग्रीर का स्वागत करने का इंतजार कर रहे हैं। वाशिंगटन और नई दिल्ली एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत को आगे बढ़ाना चाहते हैं। इसे लेकर दोनों पक्षों का कहना है कि वह लगभग पूरा हो गया है। ग्रीर 23 जून से दिल्ली में होंगे।
अमेरिकी राजदूत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि राजदूत ग्रीर का नई दिल्ली में स्वागत करने का इंतजार है! अमेरिका-भारत व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए मंत्री पीयूष गोयल के साथ कई सत्र शेड्यूल किए गए हैं! अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के ऑफिस ने रविवार को बताया कि ग्रीर उज्बेकिस्तान जाने से पहले नई दिल्ली जाएंगे।
बयान के मुताबिक, ग्रीर केंद्रीय मंत्री गोयल और दूसरे सीनियर भारतीय अधिकारियों से मिलेंगे और “ऐतिहासिक अमेरिका-भारत संयुक्त बयान और अंतरिम समझौते पर चर्चा करेंगे। ग्रीर का यह दौरा राष्ट्रपति डोनल्ड जे. ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 13 फरवरी, 2025 को शुरू की गई बड़ी अमेरिका-भारत द्विपक्षीय व्यापार समझौता बातचीत का हिस्सा है।
इस महीने की शुरुआत में फ्रांस में जी7 समिट के दौरान एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस दौरे का संकेत दिया था। उस समय, अधिकारी ने कहा था कि अमेरिका और भारतीय नेगोशिएटर “काफी गहरी” बातचीत में लगे हुए थे। उन्होंने पुष्टि की थी कि वह बातचीत जारी रखने के लिए भारत आएंगे।
यह दौरा डोनल्ड ट्रंप और पीएम मोदी की हाल की बातों के बाद हो रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने जी7 समिट के दौरान नरेंद्र मोदी से मिलने के बाद कहा था कि दोनों देश व्यापार समझौते पर पहुंचने के “बहुत करीब” हैं।
ग्रीर भारत के इस दौरे पर कितने दिनों के लिए भारत में हैं, इसे लेकर अमेरिका की ओर से कोई जानकारी सामने नहीं आई है। नई दिल्ली के अपने दौरे के बाद, ग्रीर ताशकंद जाएंगे, जहां उनका राष्ट्रपति प्रशासन के प्रमुख शावकत मिर्जियोयेव, सईदा मिर्जियोयेवा और उप प्रधानमंत्री जमशेद खोडजाएव से मिलने का कार्यक्रम है।
बयान में कहा गया कि राजदूत ग्रीर अपने समकक्षों के साथ ये सभी मीटिंग करेंगे ताकि अमेरिका के साथ स्पष्ट, संतुलित और पारस्परिक व्यापार हासिल करने पर चर्चा की जा सके।
अमेरिका भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है, और पिछले एक दशक में गुड्स और सर्विसेज में द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ रहा है। तकनीक, मैन्युफैक्चरिंग, ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स और जरूरी सप्लाई चेन्स जैसे क्षेत्रों में आर्थिक संबंध बढ़े हैं।
यह बातचीत वाशिंगटन और नई दिल्ली की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा है ताकि एक व्यापक व्यापार फ्रेमवर्क बनाया जा सके जो गहरे रणनीतिक सहयोग को समर्थन करे।
ग्रीर पहले भी भारत को कुछ बाजार पहुंच (मार्केट एक्सेस) से जुड़े मुद्दों पर एक चुनौतीपूर्ण साझेदार बता चुके हैं, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां भारत ने संरक्षणवादी नीतियां लागू कर रखी हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच एक संयुक्त रूपरेखा समझौता (जॉइंट फ्रेमवर्क एग्रीमेंट) मौजूद है, जो द्विपक्षीय वार्ताओं को आगे बढ़ाने का आधार प्रदान करता है।
व्यापार को लेकर बातचीत एक बढ़ती हुई रणनीतिक साझेदारी के साथ हो रही है, जिसमें रक्षा, नई तकनीक, जरूरी मिनरल, शिक्षा और लोगों के बीच संबंध शामिल हैं। दोनों सरकारों ने बार-बार भारत-अमेरिका संबंधों को 21वीं सदी की सबसे अहम साझेदारी में से एक बताया और मजबूत आर्थिक इंटीग्रेशन को उस विजन का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है।
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