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2025 में भारत के वस्त्र क्षेत्र में मिली बड़ी सफलता, निवेश और निर्यात में हुई शानदार बढ़ोतरी : केंद्र

सरकार ने वस्त्र क्षेत्र में जीएसटी की दर को 5 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 12 प्रतिशत थी।

 भारतीय टेक्सटाइल्स में बड़ी सफलता भारतीय टेक्सटाइल्स में बड़ी सफलता / IANS/Deepak Kumar

भारत के वस्त्र क्षेत्र ने 2025 में निवेश और निर्यात में भारी वृद्धि दर्ज की है, जिसे सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं और व्यापार में आसानी के लिए किए गए आर्थिक सुधारों से बल मिला। 

सरकार ने विश्व स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर से लैस 7 पीएम मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल (पीएम मित्र) पार्कों के निर्माण को मंजूरी दी है, जिनमें प्लग एंड प्ले सुविधा भी शामिल है। इन पार्कों के लिए 4,445 करोड़ रुपए का बजट तय किया गया है। ये पार्क तमिलनाडु, तेलंगाना, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में बनेंगे।

अब तक 27,434 करोड़ रुपए से अधिक के निवेश समझौते किए जा चुके हैं और 100 प्रतिशत जमीन भी पार्कों के लिए खरीद ली गई है। सभी राज्य सरकारों ने पार्कों के लिए 2,590.99 करोड़ रुपए की लागत से इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य शुरू कर दिया है।

सरकार ने राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (एनटीटीएम) की शुरुआत की है, जिसमें 1,480 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा। इस मिशन का उद्देश्य तकनीकी वस्त्र के उपयोग को बढ़ाना और इसे रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रमोट करना है।

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वित्त वर्ष 2024-25 में हस्तशिल्प सहित वस्त्र एवं परिधान निर्यात ने 5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की और यह 37.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इस निर्यात का सबसे बड़ा हिस्सा अमेरिका, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन को गया, जबकि बांग्लादेश, यूएई, श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे नए देशों ने भी निर्यात में 20 प्रतिशत योगदान किया।

सरकार ने वस्त्र क्षेत्र में जीएसटी की दर को 5 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 12 प्रतिशत थी। यह कदम निर्यात को बढ़ावा देने और कला कारीगरों की मदद करने के लिए उठाया गया है।

इस क्षेत्र में वस्त्र व्यापार संवर्धन (टीटीपी) विभाग ने भी भारत की वैश्विक वस्त्र बाजार में उपस्थिति को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। 2024 में भारत वस्त्र और परिधान का छठा सबसे बड़ा निर्यातक बनकर उभरा, जिसमें इस क्षेत्र का भारत के कुल निर्यात में 8.63 प्रतिशत का महत्वपूर्ण योगदान रहा और वैश्विक व्यापार में इसकी हिस्सेदारी 4.1 प्रतिशत रही।

भारत का कपास क्षेत्र कृषि अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है, जो 60 लाख किसानों और 400-500 लाख लोगों को रोजगार देता है। 2024-25 के सीजन में निगम ने 525 लाख क्विंटल कपास की खरीद की और 37,450 करोड़ रुपए किसानों को वितरित किए।

सरकार ने हस्तशिल्प और हैंडलूम के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, जिसमें 11,544 कारीगरों को मुद्रा योजना के तहत लोन दिया गया है। साथ ही, 2.35 लाख लोग सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ चुके हैं।

 

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