मां अब सिर्फ त्याग या नैतिकता की मिसाल नहीं रह गई है। वह कमियों वाली, मजेदार, उलझनों से भरी और एक संपूर्ण इंसान है। और शायद, पहली बार, उसकी अपनी एक जिंदगी भी है।

हिंदी सिनेमा के शुरुआती दशकों में हमें ऐसी मांएं देखने को मिलीं जो कोमल होने के साथ-साथ गरिमापूर्ण भी थीं।
Credit: AI Generated