जब भारतीय दर्शन पूरी दुनिया को एक कुटुम्ब या कुनबा मानता है तो इसकी व्यावहारिक तस्वीर ऐसी बनती है जिसमें परिवार के नाते सब एक दूसरे से जुड़ते हैं। यानी गार्सेटी जिस चक्र की बात करते हैं वह जिस बिंदू से आरंभ होता है फिर उसी बिंदू से आकर मिल जाता है। चक्र की पूर्णता भी यही है।

सांकेतिक तस्वीर
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